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Jabalpur Highcourt News : हाई कोर्ट ने कोरोना के शिकार हुए भावी डॉक्टर के पिता की जनहित याचिका पर मांगा जवाब

Updated: | Mon, 21 Jun 2021 09:04 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर के गुरंदी बाजार में किराना की दुकान चलाने वाले विजय कुमार चौरसिया की जनहित याचिका पर राज्य शासन, डीएमई, एलएन मेडिकल कॉलेज व सीबीआइ सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब-तलब कर लिया है। मामला जनहित याचिकाकर्ता के एमबीबीएस कर रहे बेटे विक्रांत चौरसिया की कोरोना पाजिटिव होने के बाद मृत्यु से संबंधित है।

2014 में मिला था दाखिला : मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता आदित्य संघी ने रखा। उन्होंने दलील दी कि जनहित याचिकाकर्ता के बेटे विक्रांत को 2014 में एलएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट पर दाखिला मिला था। वह फाइनल ईयर का स्टूडेंट था। सरकार के प्रविधान के अनुरूप वह हेल्थ वर्कर की परिभाषा के अंतर्गत आता था। कोविड संक्रमण के दौर में बिना कोविड गाइडलाइन का गंभीरता से पालन किए परीक्षा आयोजित कर ली गई। तीन हॉल में 500 के लगभग एमबीबीएस स्टूडेंट बैठा लिए गए। शारीरिक दूरी का ख्याल तो रखा ही नहीं गया किसी को वैक्सीनेट करने की परवाह भी नहीं की गई। बावजूद इसके कि पहले ही एम्स की गाइडलाइन जारी हो चुकी थी। इस वजह से परीक्षा के बाद कुल परीक्षार्थियों में से 32 कोरोना पॉजिटिव निकले। जनहित याचिकाकर्ता का बेटा उनमें से एक था। इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और उसकी मृत्यु हो गई। जिस दिन मृत्यु हुई उसके तीन दिन बाद घर पर प्रमाण-पत्र आया, जिसमें बेटे के डॉक्टर बन चुकने की जानकारी थी। इससे पूरा परिवार बुरी तरह व्यथित हो गया। एक किराना व्यापारी ने पूरे जीवन की कमाई जिस बेटे को डॉक्टर बनाने की खातिर लगा दी, वही नहीं रहा। लिहाजा, सीबीआइ जांच कराई जाए। साथ ही जिनके बच्चे कोरोना पाजिटिव हुए उन सभी 32 परिवारों को मुआवजा दिलाया जाए।

Posted By: Brajesh Shukla
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