Jabalpur Highcourt News : राज्य सरकार मध्यप्रदेश राज्य परीक्षा नियम 2015 में संशोधन पर विचार कर रही विचार

Updated: | Fri, 24 Sep 2021 08:30 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य परीक्षा नियम 2015 में 17 फरवरी, 2020 को किए गए संशोधन की संवैधनिकता सहित पीएससी परीक्षा 2019 के रिजल्ट निरस्त करने की मांग को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई 26 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दी है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव ने अवगत कराया कि राज्य सरकार मध्य प्रदेश राज्य परीक्षा नियम 2015 में संशोधन पर विचार कर रही है।

पीएससी परीक्षा में 113 प्रतिशत आरक्षण हो गया है : हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा गया है कि राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश राज्य परीक्षा नियम 2015 में 17 फरवरी, 2020 को संशोधन कर दिया है। संशोधन के जरिए यह प्रावधान कर दिया गया है कि मेरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अब अनारक्षित श्रेणी में शामिल नहीं किया जाएगा। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर और विनायक प्रसाद शाह ने तर्क दिया कि पीएससी परीक्षा में 113 प्रतिशत आरक्षण हो गया है। संशोधित नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा साहनी मामले में दिए गए निर्णय के विपरीत है। यह भी तर्क दिया गया कि संशोधित नियमों के अनुसार 21 दिसंबर, 2020 को घोषित किए गए पीएससी प्रारंभिक परिणामों को निरस्त किया जाए। पीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष प्रस्तुत किया।

सामान्य वर्ग के छात्रों ने दायर की हस्तक्षेप याचिका : इस मामले में गुरुवार को रतलाम निवासी अंकित दीक्षित एवं अन्य की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा पीएससी नियमों में किया गया संशोधन बिलकुल सही है। डिवीजन बैंच ने इस मामले में राज्य सरकार को जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

Posted By: Brajesh Shukla