नर्मदा की गोद में बसा 52 ताल तलैयों का शहर है जबलपुर, पानी को सहेजने में हाथ खाली

Updated: | Sat, 04 Dec 2021 11:40 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नर्मदा की गोद में बसे जबलपुर को 52 ताल-तलैयों का शहर भी कहा जाता है। शहर को नर्मदा के साथ ही परियट, गौर जैसी सहायक नदियों का वरदान मिला है। लेकिन शहर को मिली इन सौगातों को सहेजने में दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे। नर्मदा सहित अन्य नदियां जहां तेजी से प्रदूषित हो रहीं है। वहीं 52 ताल-तलैयों में से अब बमुश्किल 36 तालाब ही जीवित बचे हैं। जो अपने अस्तित्व की लड़ाई खुद ही लड़ रहे हैं।

यदि जबलपुर के कर्णधार नदी-तालाबों का संरक्षण, संर्वधन करते, गंदे पानी को उपचारित कर उसका पुन:उपयोग करते तो इंदौर की तरह कामयाब होते। 52 ताल-तलैयों के शहर जबलपुर को भी स्वच्छ सर्वेक्षण की परीक्षा में ओडीएफ प्लस-प्लस की तरह वाटर प्लस-प्लस का तमगा हासिल होता। लेकिन शहर की ये विडंबना ही कही जाएगी कि नगर निगम के अधिकारियों ने नदी, तालाब के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिए लेकिन वाटर प्लस-प्लस के हकदार नहीं बन पाए। यदि जिम्मेदार अब भी नहीं चेते तो स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में भी शहर को इस खिताब से हाथ धोना पड़ सकता है।

बजट में प्रविधान तो किया पर अमल नहीं: निवर्तमान नगर सत्ता ने अपने अपने पांच साल के कार्यकाल में नगर निगम सदन की बैठक में पेश किए गए अपने हर सालाना बजट में शहर के तालाबों को संरक्षित करने के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये का प्राविधान किया था। इस लिहाज से तालाबों के नाम पर पिछले पांच सालों में तकरीबन 25 करोड़ रुपये खर्च करने का प्राविधान किया गया। लेकिन शहर के गुलौआ, सूपाताल सहित एक-दो अन्य तालाबों को छोड़ दिया जाए तो बाकी ताल-तलैयों का संरक्षण दिखावा ही साबित हुआ। नगर सत्ता 25 में से 20 करोड़ भी तालाबों पर खर्च करती तो करीब 15 तालाबों की तस्वीर कुछ ओर ही होती। लेकिन न तो सत्ता पक्ष ने तालाबों के संरक्षण की दिशा में दृढ़ इच्छा शक्ति से काम किया और न ही विपक्ष ने उसे उसकी जिम्मेदारी याद दिलाई।

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ये है मुख्य तालाबों के हाल-

गुलौआ ताल - नगर निगम, स्मार्ट सिटी ने चार करोड़ से संवारा लोगों को कर रहा आकर्षित

संग्राम सागर - एक करोड़ किए खर्च, अधूरे कार्य से फिर हो रहा बदहाल

इमरती तालाब- गंदगी, चोई से बजबजा रहा तालाब

रानीताल - पानी इतना गंदा हो गया कि लोग इस्तेमाल नहीं कर रहे

गोकलपुर - क्षेत्रीय लोग अपने स्तर पर ही कर रहे साफ

गोपालबाग तालाब- नागरिकों ने जनसहयोग से तालाब को संवारा अब कचघर में तब्दील हो गया है।

सीता सरोबर- लाखों रुपये खर्च फिर भी नहीं संवर पाया तालाब

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नदियां भी हो रही प्रदूषित-

- नर्मदा नदी में शहर के करीब छह बड़े नाले व 15 से ज्यादा छोटी-नालियों के जरिए गंदा पानी घुल रहा है। नगर निगम ने कहने को ग्वारीघाट में साढ़े पांच लाख लीटर का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है। लेकिन अक्सर ये बंद ही रहता है।

- परियट, गौर नदी अब गोबर नदी में तब्दील हो गई है। पानी इतना गंदा और बदबूदार है कि लोग इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं।

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इंदौर ने ऐसे हासिल किया वाटर प्लस-प्लस का तमगा: स्वच्छता में लगातार नंबर वन इंदौर देश का पहला वाटर प्लस शहर होने का गौरव हासिल किया है। कान्ह-सरस्वती नदियां और उनसेे जुड़े 25 छोटे-बड़े नालेे इस गंदे पानी के सबसे बड़े वाहक थे। इनमें मिलने वाले सार्वजनिक और घरेलू आउटफाल बंद करने में कामयाबी पाई। वाटर प्लस सिटी के लिए तय सभी 12 मापदंडों पर खरा उतरा है। स्वच्छ भारत अभियान में माइक्रो लेवल पर जाने के लिए मंत्रालय ने सफाई के साथ वाटर प्लस को शामिल किया है। इसका मकसद शहरों में जलाशयों, नदियों और तालाबों को साफ करना है। मंत्रालय चाहता है कि नदी-नालों में केवल साफ और बरसाती पानी ही बहे और सीवरेज के पानी का दोबारा उपयोग होता रहे।

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नर्मदा नदी में मिल रहे गंदे पानी को रोकने के लिए साढ़े पांच लाख लीटर का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। वाटर प्लस-प्लस के लिए जरूरी मानकों के तहत कठौंदा में 50 एलएलडी का सीवेरज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण हो चुका है, तेवर और ललपुर में भी प्लांट निर्माण का कार्य जारी है। जो जल्द बनकर तैयार हो जाएगा।

कमलेश श्रीवास्तव, कार्यपालन यंत्री, नगर निगम

Posted By: Ravindra Suhane