Jabalpur Jain Samaj : हमें भगवान महावीर के रास्ते पर चलना है : आचार्यश्री

Updated: | Tue, 26 Oct 2021 09:05 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। दयोदय तीर्थ तिलवारा में चातुर्मास कर रहे आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने मंगलवार को शिष्‍यों की कक्षा में कहा कि स्वामी समंतभद्राचार्य इस युग के महान् आचार्य हैं। उन्हीं के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करना है। धर्म ध्वज को लेकर आगे बढ़ना है। इस कार्य में कोई रुकावट, रोड़ा नहीं बनेगा। इसमें सब सहायक बनेंगे, साथ चलेंगे और मार्ग प्रशस्त करेंगे। इसमें अगर बाधक बन सकता है तो सिर्फ ‘मन' बन सकता है। तन, धन और वचन तीनों ही पर 'मन' न हो तो काम नहीं बन सकता है। मन अशांत हो सकता है। हमें उसे मजबूत वा शांत रखना होगा और आगे बढ़ना होगा। अब मोक्ष मार्ग गाड़ी चालू करना बाकी है, संकेत हो चुके हैं। हमें किधर चलना है? उधर जिस रास्ते भगवान महावीर गए थे। हमें उस ओर जाना है, जहां अहिंसा, सत्यता, अचौर्य, सुशीलता व अपरिग्रह हो।

हम पैसे को जकड़े हुए हैं : आचार्यश्री ने कहा कि हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील आदि लाइन को बंद कर दें। हमें कुसंगी नहीं, सुसंगी बनना है। अगर हमारा शरीर काम करने लायक नहीं है, वचन भी हमारे बोलने लायक नहीं हैं तथा धन भी खर्च करने के लिए नहीं है, तो भी क्या हुआ ‘मन' तो है। हम अपना रास्ता बना सकते हैं। वर्तमान में तो तन, मन, धन और वचन सब कुछ है, कमी किसी चीज की नहीं है। स्वाभिमानी व्यक्ति को विचार करना चाहिए कि भगवान महावीर ने राज-पाट, धन-वैभव सारे सुखों को छोड़ा और हम पैसे को जकड़े हुए हैं, हम कैसे उनके अनुयायी हैं? महावीर भगवान को हम वीर कहते हैं। हम त्याग करने में पीछे नहीं हटेंगे। हम कर्मों का मूल धन नहीं तो कम से कम ब्याज तो चुकाएंगे।

Posted By: Brajesh Shukla