काल भैरव अष्टमी : अकाल मृत्यु से मुक्ति दिलाते हैं शिव के रूद्र स्वरूप

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 11:06 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। काल भैरव का स्वरूप भगवान शिव का रुद्र स्वरूप है। हर माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी व्रत किया जाता है। लेकिन मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को काल भैरव का अवतरण दिवस मनाया जाता है। इसलिए शहर के काल भैरव मंदिरों में विशेष अनुष्‍ठान होगा। कुछ स्‍थानों पर अनुष्‍ठान शुरू भी हो गए हैं जिसका समापन शनिवार को होगा।

बाधाओं का होता है नाश : मान्यता है कि इस दिन काल भैरव का अवतरण हुआ था। कहते हैं कि काल भैरव की पूजा से अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। इस साल काल भैरव जन्‍मोत्‍सव 27 नवंबर को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव की विधि-विधान से पूजा करने से तंत्र, मंत्र, भूत, प्रेत बाधा का नाश होता है। काल भैरव जन्‍मोत्‍सव के दिन विधि पूर्वक पूजा, व्रत करने से सारी बाधाओं का नाश होता है। इस दिन पूजन में काल भैरव चालीसा पाठ और उनके वाहन कुत्ते को भोजन जरूर करवाना चाहिए।

काल बनकर किया था तांडव : ज्‍योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे ने बताया कि जब भगवान शंकर का अपमान हुआ था, तब सती ने यज्ञ कुंड में कूद कर देह का दहन कर लिया था। इससे कुपित भगवान ने भैरव को यज्ञ ध्वंस के लिए भेजा था। साक्षात काल बनकर भैरव ने तांडव किया था। जानकारों के अनुसार काल भैरव की महत्ता इससे ही समझी जा सकती है कि जहां-जहां ज्योर्तिलिंग और शक्तिपीठ हैं, वहां-वहां काल भैरव को स्थान मिला है। वैष्णो देवी, उज्जैन के महाकालेश्वर, विश्वनाथ मंदिर आदि में काल भैरव मौजूद हैं।

गढ़ा में आयोजन शुरू : काल भैरव के जन्‍मोत्‍सव पर गढ़ा बाजार स्थित मंदिर में दो दिवसीय आयोजन शुक्रवार को शुरू हुआ। सुबह मानस पाठ के साथ भक्‍तों ने अनुष्‍ठान शुरू किया। शनिवार को सुबह 7बजे से रुद्राभिषेक और पूजन शुरू होगा। इसके पश्‍चात महाभोग का वितरण होगा। इसी तरह ग्‍वारीघाट मुक्तिधाम स्थित मंदिर में दोपहर 12 दिव्‍य पूजन किया जाएगा। साथ ही शाम 6 बजे से भजन संध्‍या का आयोजन होगा।

Posted By: Brajesh Shukla