Jabalpur News : वैदिक मंत्रों के उच्चारण से बढ़ती है मस्तिष्क की क्षमता

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 04:30 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। महाकोशल विज्ञान परिषद द्वारा जिज्ञासा कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस आनलाइन आयोजन में कई विशेषज्ञ विज्ञानियों के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में योगदान पर अपनी बात रख रहे हैं। इस क्रम में एसोसिएट डायरेक्टर आरसीआइ हैदराबाद डा. एस करुणानिधि ने कहा कि जब 1811 में इंग्लैंड में पहला स्कूल शुरू हुआ था उस समय भारत में 732000 गुरुकुल, तक्षशिला, नालंदा जैसे विश्वविद्यालय थे। जिनमें अग्नि विद्या, वायु विद्या, धातु विद्या, सूर्य विद्या जैसी अनेक उन्नत विधाओं का ज्ञान दिया जाता था। उन्होंने बताया कि शोध में यह तथ्य सामने आया है कि संस्कृत के वैदिक मंत्रों के उच्चारण से मस्तिष्क की क्षमता बढ़ती है। साथ ही डीआरडीओ द्वारा विकसित किए गए मिसाइल कंट्रोल सिस्टम के बारे में भी डा. करुणानिधि ने जानकारी दी।

भ्रांतियों पर न दें ध्‍यान : द्वितीय वक्ता दिल्ली से डा. नील सरोवर शामिल हुए। जिन्होंने भारत में बनने वाली वैक्सीन उनके उत्पादन क्षमता के बारे में बताते हुए कहा कि वैक्सीन के बारे में कई भ्रांतियां हैं कि वह अपने इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है या आपके डीएनए को बदल देती है या इनफर्टिलिटी विकसित कर सकती है, तो ऐसा नहीं है। भारत में कोविड मैनेजमेंट की जानकारी भी डा. नील ने दी। अगले वक्ता के रूप में ब्रह्मोस के सीएमडी डा. सुधीर मिश्रा ने कहा कि ब्रह्मोस एक माडेम रेंज की सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है। जिसे पनडुब्बी, जहाज, एयरक्राफ्ट या जमीन से दागा जा सकता है। मिसाइल के अंदर नेविगेशन सिस्टम है जिससे सटीक निशाने पर मिसाइल जाती है। साथ ही 300 से 500 किलोमीटर की इसकी रेंज है। भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने में ब्रह्मोस मिसाइल का महत्वपूर्ण स्थान है। आइसीएमआर के डायरेक्टर डा. अपरूप दास ने कहा कि हम सभी के लिए गर्व की बात है कि हमारे देश ने 100 करोड़ वैक्सीन का लक्ष्य पूरा कर लिया है। भारत की जनसंख्या को देखते हुए पिछले तीन माह पहले वैक्सीनेशन के इस लक्ष्य को पाना असंभव लग रहा था। भारत के कुशल नेतृत्व में बनाई गई स्ट्रेटजी और स्वास्थ्य व रिसर्च संस्थानों की कड़ी मेहनत से ही संभव हो पाया है। जिज्ञासा कार्यशाला का संचालन सुनीता शर्मा ने किया। अतिथि परिचय निमिषा कौर बामरा ने और विनीता रातोनिया ने दिया। आयोजन को सफल बनाने में महाकोशल विज्ञान परिषद के प्रधान विज्ञानी डा. निपुण सिलावट व अन्य सदस्यों का सहयोग मिल रहा है। गौरतलब है की इस कार्यशाला का आयोजन पांच दिवसीय है जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्वतंत्रता संग्राम में विज्ञानियों के योगदान के बारे में जानकारी देना है।

Posted By: Brajesh Shukla