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Jabalpur News: दबे पांव गांवों में पहुंचा कोरोना, खतरा भांपते ही अस्पतालों में सेंट्रल आक्सीजन की तैयारी

Updated: | Sun, 18 Apr 2021 02:30 PM (IST)

रामकृष्ण परमहंस पाण्डेय, जबलपुर। कोरोना महामारी ने दबे पांव ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तक दे दी है जिसे लेकर संस्कारधानी से राजधानी तक हड़कंप मच गया है। एक अनुमान के मुताबिक जिले के ग्रामीण अंचलों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या पांच हजार के आंकड़े को पार कर चुकी है जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 16 अप्रैल तक सिर्फ 540 मरीज दर्ज हो पाए हैं। हालात से निपटने के लिए सरकार ने ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में सेंट्रल आक्सीजन सुविधा की तैयारी कर ली है। लाखों रुपये का बजट जारी किया गया है ताकि सप्ताह भर के भीतर कोरोना संक्रमित मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर सेंट्रल लाइन से आक्सीजन देकर जान बचाई जा सके। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो दूसरी लहर में पाटन, सिहोरा व पनागर में कोरोना मरीजों का आंकड़ा शतक लगा चुका है। कोरोना के बढ़ते खतरे के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में सैंपलिंग पर जोर नहीं दिया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना दो से तीन हजार सैंपलिंग की आवश्यकता है। समय रहते मरीजों की पहचान न की गई तो शहरी क्षेत्र से भी भयावह हालात ग्रामीण अंचल में बन सकते हैं।

सिहोरा में सर्वाधिक 50 बिस्तरीय आक्सीजन सुविधा: गांवों में कोरोना वायरस के संक्रमण के बढ/ते खतरे को ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रत्येक सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम लगाने की तैयारी कर ली है। सर्वाधिक 50 बिस्तरीय आक्सीजन सुविधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिहोरा में की जा रही है। वहीं पाटन, शहपुरा, मझौली व पनागर स्वास्थ्य केंद्रों में 20—20 तथा कुंडम बरगी, बरेला में 10—10 बिस्तरीय सेंट्रल आक्सीजन सुविधा की तैयारी जारी है। बताया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों से तमाम कोरोना संक्रमित शहर स्थित अस्पतालों में सीधे पहुंच रहे हैं। जिसके चलते गांवों में स्थिति का सही अनुमान नहीं लग पा रहा है।

भयावह हो सकते हैं हालात, दवा न अमला: इधर, चिकित्सकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना ने पांव पसारे तो हालात भयावह हो सकते हैं। उनका कहना है कि सरकार सेंट्रल आक्सीजन व वेंटीलेटर पर जोर दे रही है। कोरोना के पहले दौर में जो वेंटीलेटर ग्रामीण क्षेत्रों को दिए गए थे, उसे कोई चलाने वाला नहीं है। जिसके चलते ज्यादातर वेंटीलेटर धूल खा रहे हैं। अब सेंट्रल आक्सीजन की सुविधा पर लाखों रुपये खर्च करने की तैयारी है परंतु चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की भर्ती नहीं की जा रही। डॉक्टर व कर्मचारी के बगैर सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम किस काम आएंगें वेंटीलेटर की तरह यह व्यवस्था भी ठप हो जाएगी। चिकित्सकों ने बताया कि कोरोना महामारी कहर बरपा रही है। तमाम ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में संभावित लक्षण वाले मरीजों की भीड़़ उमड़ रही है। फेमी फ्लू व पैरासीटामॉल जैसी दवाओं की कमी बरकरार है। मरीजों को सिर्फ दो—तीन दिन की दवा मिल पा रही है।

ब्लॉक कुल मरीज सक्रिय मरीज

शहपुरा 36 25

कुंडम 43 33

पाटन 113 77

सिहोरा 100 61

पनागर 109 59

मझौली 57 43

बरेला 82 72

योग 540 364

—364 मरीज होम आइसोलेशन में हैं।

—375 है सक्रिय मरीजों की संख्या।

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कोरोना संक्रमण का खतरा ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है। जिसे देखते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। खंड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ज्यादा से ज्यादा संदिग्धों की सैंपलिंग कर कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ी जाए।

डॉ. रत्नेश कुरारिया, सीएमएचओ

Posted By: Ravindra Suhane
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