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Jabalpur News: हाई कोर्ट ने 10 मार्च तक के लिए बढ़ाई डुमना रोड मामले की सुनवाई

Updated: | Fri, 26 Feb 2021 11:50 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने डुमना रोड के लिए पेड़ काटने व पौधे लगाने की रिपोर्ट पेश करने के लिए राज्य शासन को समय दे दिया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने राज्य शासन से ट्रिपल आईटी डीएम में हो रहे निर्माण की भी जानकारी पेश करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को निर्धारित की गई है।

रोड निर्माण के लिए हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे : गंगानगर कॉलोनी, जबलपुर निवासी पर्यावरण प्रेमी निकिता खंपरिया की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय से लेकर डुमना एयरपोर्ट तक रोड का निर्माण किया जा रहा है। रोड निर्माण के लिए हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्रेयस पंडित ने दलील दी कि पेड़ काटने के लिए केंद्र शासन के वन मंत्रालय से विधिवत अनुमति नहीं ली गई है। पिछली सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि रोड निर्माण के लिए कितने पेड़ काटे जाएंगे और कितने पौधे लगाए जाएंगे? गुरुवार को उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने बताया कि छह मार्च को पीडब्ल्यूडी के प्रमुख सचिव जबलपुर आ रहे हैं। उनकी मौजूदगी में रिपोर्ट तैयार की जाएगी कि डुमना रोड के लिए कितने पेड़ काटे जाएंगे। इसके साथ ही कितने पौधे लगाए जाएंगे। लिहाजा, रिपोर्ट पेश करने के लिए समय दिया जाए। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने रिपोर्ट पेश करने के लिए 10 मार्च तक का समय दे दिया।

नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित को जमानत नहीं : विशेष अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपित जबलपुर निवासी टिन्नू उर्फ तरुण कोल की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अभियोजन की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि पुलिस ने जिन धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है, वे गंभीर हैं। ऐसे में जमानत दिए जाने से समाज में गलत संदेश जाएगा। 27 सितंबर, 2020 को सुबह छह बजे नाबालिग अचानक घर से गायब हो गई थी। आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश के बावजूद नहीं मिली। लिहाजा, थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने पूछताछ करने पर तथ्य जुटाए। जिनसे साफ हुआ कि आरोपित नाबालिग को शादी का झांसा देकर अपने साथ कहीं ले गया था। उसने कई बार जबरन दुष्कर्म किया। इस तरह के मामले समाज के लिए अभिशाप हैं। इसलिए आरोपित को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। कोर्ट ने तर्क से सहमत होकर अर्जी खारिज कर दी।

Posted By: Brajesh Shukla
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