Jabalpur News : राष्ट्रपति के आदेश के खिलाफ कैसे जारी कर दी अधिसूचना, मामला हाई कोर्ट पहुंचा

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 01:09 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारत के राष्ट्रपति ने जबलपुर को जो विशेष दर्जा दिया था, उसे बिना राष्ट्रपति की अनुमति के कैसे छीन लिया गया। यह सवाल खड़ा करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना को कठघरे में रखा गया है। इस सिलसिले में बाकायदा एक याचिका दायर कर दी गई है। इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की मांग की गई है। जबलपुर की अस्मिता से खिलवाड़ को आधार बनाया गया है।

मुख्यपीठ शब्द को विलोपित किया गया : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक याचिका के जरिये मुख्यपीठ शब्द विलोपित किए जाने के रवैये को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, जबलपुर के अध्यक्ष डा.पीजी नाजपांडे व नयागांव, जबलपुर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय पैरवी करेंगे। उन्होंने अवगत कराया कि भारत के राष्ट्रपति ने 27 अक्टूबर, 1956 को आदेश जारी कर जबलपुर में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ की घोषणा की थी। लिहाजा, राष्ट्रपति के आदेश को रद करने का अधिकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को नहीं है। इसके बावजूद अनाधिकार चेष्टा करते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने हाई कोर्ट नियम-2008 में किए गए संशोधन का हवाला देते हुए आठ अक्टूबर, 2021 को मध्य प्रदेश राजपत्र में अधिसूचना जारी कर दी, जिसके अनुसार जबलपुर के आगे से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ शब्द को विलोपित कर दिया गया है। चूंकि यह अधिसूचना भारत के संविधान के विपरीत है, असंवैधानिक है, अत: निरस्त किए जाने योग्य है। इसी मंशा से हाई कोर्ट में याचिका दायर करने से पूर्व रजिस्ट्रार जनरल को लीगल नोटिस भेजा गया था।

Posted By: Brajesh Shukla