Jabalpur News : हाइब्रिड सर्जरी से बंद कर दिया मासूम के दिल का छेद

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 06:45 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के सहारे निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने डेढ़ साल के मासूम बालक की जिंदगी बचा ली। दिल में छेद की जन्मजात बीमारी से बालक को बचाने के लिए हाइब्रिड सर्जरी की गई। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के अंतर्गत मासूम का आपरेशन दमोहनाका चौक स्थित बड़ेरिया मेट्रो प्राइम मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल में किया गया। चिकित्सकों का दावा है कि दिल के छेद भरने के लिए इस तरह का जटिल आपरेशन मध्य भारत में पहली बार किया गया। मेट्रो अस्पताल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बाल ह्दय रोग विशेषज्ञ डा. उमा महेश्वर ने उक्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड सर्जरी फिलहाल देश के कुछ चुनिंदा शहरों में ही संभव है। अस्पताल के डायरेक्टर राजीव बड़ेरिया, डा. सुनील जैन, डा. दिलीप तिवारी, डा. अमजद अली, डा. विनीत चावला इस दौरान मौजूद रहे।

जन्म से बीमार, छह किलोग्राम वजन: डा. महेश्वर ने बताया कि सिवनी निवासी 18 माह का बालक पूरब गिरी दिल में छेद की जन्मजात बीमारी से ग्रस्त था। सर्दी, जुकाम, निमोनिया का उपचार कराने के लिए अल्प आयु में उसे कई बार अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। डेढ़ साल की उम्र में उसका वजन छह किलोग्राम तक बढ़ पाया। इस बीच उसने मेट्रो हास्पिटल में परामर्श लिया। जांच उपरांत दिल का छेद भरने के लिए आपरेशन का निर्णय लिया गया।

जान का जोखिम था इसलिए नए तरह का आपरेशन : डा. महेश्वर ने बताया कि बालक के ह्दय के निचले हिस्से में लगभग 16 एमएम का बड़ा छेद था। आपरेशन के दो विकल्प सामने आए। पहला लेजर आपरेशन, जिससे पैर की नस से एक छल्ला बनाकर ह्दय का छेद बंद करना तथा दूसरा ओपन हार्ट सर्जरी। परंतु बालक के दिल में छेद काफी नीचे था। फेफड़ों में ज्यादा दबाव के कारण ओपन हार्ट सर्जरी अथवा छल्ले से दिल का छेद बंद करना संभव नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद ह्दय शल्य चिकित्सा विभाग की टीम ने हाइब्रिड सर्जरी का निर्णय लिया। टीम ने बच्चे के ह्दय को ऊपर निकाला और सीधे छल्ला लगाकर आपरेशन से छेद बंद कर दिया। आपरेशन के सात दिन बाद बालक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

Posted By: Brajesh Shukla