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Jabalpur News : पाठ्यपुस्तकों में शामिल हो बलिदानी गाथा

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 04:50 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। महारानी दुर्गावती ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए वीरता की इबारत रची। उनके शौर्य और साहस को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करने से वर्तमान पीढ़ी दिशा प्राप्त करेगी। रानी दुर्गावती गोंडवाना राज्‍य की ऐसी शासक वीरांगना थीं, जिन्‍होंने मुगल सेना को परास्‍त कर बलिदान दिया। वीरांगना दुर्गावती नारी शक्ति का प्रतीक थीं। वीरांगना की शौर्य गाथा वर्तमान पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है। इससे बालिकाओं को आगे बढ़ने और कुछ करने का हौसला मिलता है। इसे पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया जाना चाहिए ताकि बच्चे अपने शहर के इतिहास के साथ ही वीरांगना के बारे में जान सकें और उनके बलिदान के महत्व को समझ सकें। यह विचार एकता और शक्ति संस्‍था द्वारा आयोजित महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर आयोजित संगोष्‍ठी में अतिथियों ने व्‍यक्‍त किए। मुख्य अतिथि प्रतुल श्रीवास्तव रहे। अध्यक्षता अमरेंद्र नारायण ने की। स्वागत भाषण संतोष नेमा संतोष ने दिया।

एकता और शक्ति जरूरी : विशिष्ठ अतिथि इंजी.विवेकरंजन श्रीवास्तव एवं प्रमुख वक्ता राजेश पाठक प्रवीण ने कहा कि एकता और शक्ति के बल पर ही वर्तमान विसंगतियों का सामना कर सकते हैं। सरस्वती वंदना अर्चना द्विवेदी गुदालू ने प्रस्तुत की। संचालन प्रभा विश्वकर्मा शील ने किया। अतिथि स्वागत राजेन्द्र मिश्रा, डॉ. अरुणा पांडे, डॉ.आशा श्रीवास्तव, निशि श्रीवास्तव, मधु कौशिक ने किया। काव्य गोष्ठी में शौर्य, साहस, वीरता की प्रेरणास्‍पद रचनाओं को मनोहर चौबे आकाश, मंजरी अरविंद गुरु, प्रभा श्रीवास्तव बच्चन, राजेन्द्र मिश्रा, सुभाष शलभ, निर्मला डोंगरे, कालिदास ताम्रकार, आशा श्रीवास्तव, डॉ. मुकुल तिवारी, शोभारानी तिवारी इंदौर, प्रमोद दाहिया, चंदादेवी स्वर्णकार, कुंजीलाल चक्रवर्ती ने प्रस्तुत की। सभी की प्रस्तुतियों ने लोगों में ऊर्जा भर दी।

Posted By: Brajesh Shukla
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