जबलपुर विश्‍वविद्यालय : कुलपति को भी नहीं बक्शा, खा गए रुपये

Updated: | Tue, 07 Dec 2021 07:10 AM (IST)

कॉलम- करंट- पंकज तिवारी, नईदुनिया जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में अनियमितता से जुड़े कई किस्से होते हैं लेकिन एक कुलपति के भी पैसे खाने का रोचक मामला आया है। विश्वविद्यालय से महाकाल की नगरी में कुलपति बनकर पहुंचे प्राध्यापक अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक दशक पहले विश्वविद्यालय में छात्रावास अधीक्षक रहते हुए विद्यार्थियों की मांग पर अलमारी खरीदी की। नौ हजार की खरीदी का बिल विश्वविद्यालय में नहीं लग सका। इस बीच अधीक्षक साहब भी बड़े ओहदों पर बाहर चले गए। वक्त गुजरा और रकम का समायोजन नहीं होने पर ब्याज लगने लगा। कुलपति साहब कुछ साल पहले लौटे तो हिसाब -किताब चुकता करने पुराने छात्र को बिल और ब्याज का पैसा थमाकर लौट गए। इधर, छात्र ने रकम दाएं-बाएं कर दी और हिसाब कागजों पर चलता रहा। साहब फिर पहुंचे तो उन्हें बकाया होना पता चला। कुलपति ने फौरन अपने सामने 32 हजार रुपये की रकम जेब से भरकर बकाया खत्म किया।

गीत-संगीत के साथ संगमरमरीय वादियों में प्रशिक्षण :

भाजपा संगठन ने शहर से दूर संगमरमरीय वादियों के करीब कार्यकर्ता प्रशिक्षण शिविर किया। इस आवासीय शिविर का कार्यकर्ता पिकनिक की तरह लुत्फ उठा रहे हैं। हरियाली के करीब मां नर्मदा के बीच आकर कार्यकर्तायों में कोरोना का भय भी गायब है। संगठन की नीति पर निष्ठावान कार्यकर्ता प्रशिक्षण वर्ग के बाद जमकर मस्ती कर रहे हैं। संगठन के मुखिया ने भी टीम को इस मौके पर भरपूर छूट दे रखी है। परिवार की तरह एक दूसरे के साथ बैठकर कार्यकर्ता शाम ढलते ही जहां गीत-संगीत का आनंद उठाने में मशगूल हो जाते हैं, वहीं सुबह से संगमरमरीय चट्टानों में अटखेलियां करते घूम रहे हैं। इधर, महिलाओं की टोली भी अपने तरीकों से शिविर की यादों को संजोने में जुटी है। सर्दी के बीच प्रशिक्षण शिविर के साथ संगठन के कार्यकर्ता पर्यटन का भी मजा ले रहे हैं। शायद यही वजह है कि कार्यकर्ताओं का भी मन प्रशिक्षण में लग रहा है।

रसूखदारों के आगे बदल दी योजना :

शहर के बीच बन रहे प्रदेश के सबसे लंबे फ्लाइओवर को लेकर कई अड़चन आईं। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का विरोध हुआ लेकिन फ्लाइओवर का निर्माण नहीं थमा। यहीं फ्लाइओवर जब रानीताल से मदनमहल थाने के बीच से निकल रहा है तो जरूर इसमें कुछ बदलाव हो रहे हैं। निर्माण के बीच बदलाव की वजह यहां रहने वाली आबादी है, जिनके निर्माण इससे बाधित हो रहे हैं। राजनीतिक अहमियत रखने वाले इस इलाके में एक से बढ़कर एक रसूखदार है। जिसकी पहुंचे भोपाल से लेकर दिल्ली दरबार तक है। कुछ नागपुर तक पकड़ रखते हैं। ऐसे में इनकी अनदेखी करना आसान नहीं था। विभाग ने निर्माण में ही कुछ खर्च बढ़ाकर बदलाव करना बेहतर समझा। अब इस इलाके में बिजली की लाइन जमीन की ऊपर खींचने के बजाय जमीन के अंदर करने की योजना बन गई है। इस बदलाव से काफी निर्माण को सुरक्षित करने का प्रयास किया गया है।

सेवा को मिला सम्मान :

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में एक सेवानिवृत्ति का कार्यक्रम देखने वालों के दिलों में उतर गया। ये सेवा सम्मान था। मौका था शारीरिक शिक्षण विभाग के प्राध्यापक प्रो.आरके यादव की सेवानिवृत्ति का। उनके चाहने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि देखने वाले दंग रह गए। स्थानीय नहीं अन्य संस्थानों से खेल अधिकारी सेवा से विदाई देने पहुंचे। विश्वविद्यालय में यूं तो कई दिग्गज सेवानिवृत्त होते हैं लेकिन विदाई की बेला पर उनके साथ कम ही चेहरे नजर आते हैं लेकिन यहां नजारा अलग रहा। कार्यक्रम भी सेवा सम्मान का था। शायद यही वजह थी कि सम्मान के लिए स्टूडेंट, साथी के अलावा अन्य लोग भी पहुंच गए। कुलगुरु के साथ दूसरे गुरु भी उनकी ख्याति और विभाग का समन्वय देखकर सोचने पर मजबूर हो गए। घंटों तक आने जाने वालों का तांता लगा रहा। ज्यादातर प्राध्यापक भविष्य में होने वाले अपने विदाई को यादगार बनाने का ख्वाब संजोकर वापस लौट गए।

Posted By: Brajesh Shukla