जबलपुर विश्‍वविद्यालय : केशव में जलेगा कि बुझेगा दीपक

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 04:17 PM (IST)

कॉलम- करंट- पंकज तिवारी, नईदुनिया जबलपुर। कांग्रेस नेता का बेटे दुष्कर्म में फंसा तो उसे बचाने में एक पुलिस अफसर खास रुचि ले रहे हैं। पुरानी दोस्ती के लिए वे अपनी वर्दी भी दांव पर लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी में एक केस में भी इन्होंने अपने दोस्त को बचाने के लिए काफी उठापटक की थी। बाद में अफसरों ने इन्हें जांच से अलग किया। फिर भी उनके तौर तरीके में बदलाव नहीं आया। इस बार भी कुछ ऐसा हो रहा है। लिहाजा संघ के कान तक बात पहुंच गई। अफसर केशव-कुटिया में तलब हो गए। खूब सुनी और थोड़ी सफाई पेश की लेकिन केशव में लोग सब जानते हैं। दीपक को साफ कहा गया कि इस गंभीर मसले पर रहमदिली का कोई भी फार्मूला न लगाओ। पूरे मामले किसी सिफारिश को दरकिनार कर निष्पक्ष और सख्ती के साथ कार्रवाई की जाए।

प्रभारी मंत्री में मामा है : भाजपा की सरकार बनते ही शामिल हुए एक नेता को अपना प्रभाव बनाने के लिए बड़बोलापन भारी पड़ गया। हुआ यूं कि भाजपा के नए नवेले नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट से आते हैं। पिछले दिनों पार्टी का एक कार्यक्रम कार्यालय में हुआ। जहां नेता भी पहुंच गए। संगठन में नए हैं इसलिए नेताओं से मेलजोल बढ़ाते रहते हैं। प्रभारी मंत्री को लेकर नेताजी ने चंद कार्यकर्ताओं से चर्चा छेड़ दी। प्रभारी मंत्री के परिवार की नेत्री से ही जान पहचान पूछी। नेत्री ने सहजता के साथ जवाब दिया लेकिन नेताजी समझ नहीं सके। उन्होंने प्रभारी मंत्री को अपना मामा बता दिया। कहा कि उनके रहली वाले ठिकाने से उनकी रिश्तेदारी है वो अगली बार घर भोजन करने का वादा कर गए हैं। ये बात सुनकर करीब बैठे नेता अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे थे क्योंकि जिनके सामने नेताजी छोड़ रहे थे वो खुद उनके घर की बहू है।

नेताजी को घेरने जालसाज पर हमला : जालसाज परिवार के खिलाफ भाजपा के नेताओं ने एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय घेरा। कहते हैं कि जालसाज ने करोड़ों रुपये का हेरफेर किया है। कई लोगों के रुपये दबाएं हैं। अब उनके खिलाफ नेताओं का हल्ला यूं ही नहीं था। चर्चा है कि जालसाज को बचाने में एक नेता जो सरकार का हिस्सा है उनकी रुचि खूब है। ये बात दिग्गज नेता को पता चल गई। उनके इशारे में हल्ला शुरू हो गया। पुलिस जालसाज को जानबूझकर गिरफ्तार नहीं कर रही है। कहते हैं कि आरोपितों को गिरफ्तार नहीं करने की बड़ी वजह नेताजी ही हैं। उन्हीं के अशीर्वाद की वजह से जालसाज बचा हुआ है इधर यह बात दूसरे गुट को पच नहीं रही है। वो मामले में गिरफ्तारी करवाकर विरोधी नेताजी के प्रभाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। यही तो राजनीति है जिसमें पार्टी के अंदर अपनों की ही टांग खिंचाई होती है।

चुनावी दौर में नेताओं का स्टंट : रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में पिछले दिनों हड़ताल का हल्ला हुआ। इसमें कई मांग ऐसी थीं जिनका स्थानीय स्तर पर कोई लेना देना नहीं था लेकिन चुनावी वक्त में ऐसी हड़ताल के बहाने ही कर्मचारी अपना दांव मजबूत करना चाहते हैं। मामला ऐसा है कि एक माह बाद कर्मचारी संघ के चुनाव होने हैं ऐसे में कर्मचारियों के हितैशी धरने के जरिए प्रशासन से सीधेतौर पर आमने-सामने खड़े हुए हैं। इधर प्रशासन ने चुपके से नेताओं को बता दिया कि मांग पूरी होना मुमकिन नहीं इसलिए बीच का रास्ता निकाला जाए। कर्मचारी नेता भी समझ गए कि ज्यादा लंबे वक्त तक हड़ताल खींचना मुमकिन नहीं है इसलिए कुछ स्थानीय मांगों पर अमल का भरोसा लेकर कर्मचारियों ने हड़ताल को टाल दिया है, ताकि चुनाव के वक्त दोबारा इन मुद्दों को आंदोलन में बदलकर कर्मचारी नेता अपने लिए वोट जुटा सके। इधर कर्मचारी भी नेताओं के दांवपेंच को बखूबी समझ रहे हैं।

Posted By: Brajesh Shukla