खैरहा के कुंवर मानधाता सिंह ने जोड़ा था जनरल बिपिन रावत का शहडोल से रिश्ता

Updated: | Thu, 09 Dec 2021 07:59 AM (IST)

जबलपुर/शहडोल, नईदुनिया प्रतिनिधि। देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के निधन की खबर सुनते ही समूचे शहडोल जिले में शोक की लहर दौड़ गई। सोहागपुर गढ़ी में स्वजनों के साथ परिचित एकत्रित होने लगे। जनरल बिपिन रावत की शादी 1986 में शहडोल सोहागपुर के इलाकेदार मृगेंद्र सिंह की मंझली बेटी मधुलिका सिंह से हुई थी। यह शादी सोहागपुर में रहने वाले राजपुरोहित सुनील द्विवेदी ने करवाई थी।

खैरहा गढ़ी के राजा सिंह ने बताया कि जनरल बिपिन रावत का रिश्ता शहडोल से जोड़ने में मुख्य भूमिका उनके पिता और खैरहा के रियासतदार स्व कुंवर मानधाता सिंह ने निभाई थी। राजा सिंह ने बताया कि उनकी बुआ प्रतिभा सिंह की शादी उत्तराखंड के बंजारा स्टेट में हुई थी। वह देहरादून में रहती थीं। बुआ प्रतिभा सिंह के ससुराल पक्ष की तरफ से ही जनरल बिपिन रावत का रिश्ता था। यहीं से सबसे पहले उनके पिता स्व कुंवर मानधाता सिंह का परिचय जनरल बिपिन रावत से हुआ था।

कुंवर मृगेंद्र सिंह ने सौंपी थी जिम्मेदारी : खैरहा के राजा सिंह ने बताया कि उनके पिता कुंवर मानधाता सिंह और कुंवर मृगेंद्र सिंह परिवार के रिश्ते में भाई-भाई लगते थे। दोनों के बीच संबंध इतने मधुर थे कि ये आपस में सगे भाइयों की तरह रहते थे। अपनी बेटी मधुलिका सिंह के लिए रिश्ता देखने की जिम्मेदारी कुंवर मृगेेंद्र सिंह ने खैरहा के कुंवर मानधाता सिंह को सौंपी थी। जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए कुंवर मानधाता लगातार मधुलिका के लिए लड़के देख रहे थे तभी उनकी बहन प्रतिभा सिंह ने अपने ससुराल पक्ष के रिश्तेदार बिपिन रावत के बारे में जानकारी दी। तब बिपिन रावत सेना में कैप्टन हुआ करते थे।

एक बार में ही सबको आए थे पसंद : जनरल बिपिन रावत के पिता भी उस समय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर थे। उनके परिवार की सादगी और तब कैप्टन रहे बिपिन रावत का सामान्य व्यवहार देखकर वे सबको एक नजर में ही सबको पसंद आ गए थे। खैरहा के कुंवर मानधाता सिंह के कहने पर मृगेंद्र सिंह ने एक बार में ही अपनी बेटी मधुलिका का रिश्ता बिपिन रावत के साथ तय कर दिया था।

जनवरी में शहडोल आने का किया था वादा : जनरल बिपिन रावत के छोटे साले कुंवर यशवर्धन सिंह ने बताया कि बीते दशहरे में उनकी मुलाकात जीजा बिपिन रावत और दीदी मधुलिका से हुई थी। वे बेहद खुश थे। जब उनसे मैंने शहडोल आने का आग्रह किया तो उन्होंने मुझसे कहा था कि मैं जनवरी में शहडोल आउंगा। वे लगभग एक दशक से अपने ससुराल शहडोल नहीं आए थे।

यशवर्धन सिंह ने बताया कि जीजा जी का सपना था कि वे शहडोल को एक सैनिक स्कूल की सौगात दें, यदि वे जनवरी में शहडोल आते तो निश्चित ही यह सौगात शहडोल को मिलती। उन्होंने बताया कि शहडोल से सीधी उनसे बात नहीं हो पाती थी। उनसे बात करने के लिए हमें उनके एडीसी से बात करना होता था। उनके सभी दौरे इतने गोपनीय होते थे कि उनके आने के बाद ही हम लोगों को इसकी जानकारी मिलती थी।

जनरल बिपिन रावत का निधन सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। जनरल बिपिन रावत का रिश्ता शहडोल से जोड़ने में मेरे पिता स्व. कुंवर मानधाता सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हमारी बुआ के ससुराल पक्ष की रिश्तेदारी रावत परिवार से थी। उन्होंने ही यह रिश्ता कुंवर मृगेंद्र सिंह को बताया था। उनका पूरा परिवार बहुत ही साधारण व्यवहार करने वाला परिवार था। - राजा सिंह, कुंवर मानधाता सिंह के पुत्र

Posted By: Brajesh Shukla