Madhya Pradesh High Court: सुपरवीजन के लिए मनमानी नियुक्ति पर राज्य शासन से जवाब-तलब

Updated: | Tue, 28 Sep 2021 12:50 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क सुपरवीजन में अयोग्य टीम लीडरों की अनुमोदन पर कार्रवाई के लिए दायर याचिका पर राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने तीन सप्ताह में जवाब प्रस्तुत करनेे का निर्देश दिया है।

राजधानी भोपाल निवासी पत्रकार नीरज निगम की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग का सुपरवीजन करने का ठेका थीम इंजीनियरिंग और आइकन इंजीनियरिंग को मिला था। याचिकाकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई कि राजमार्ग के सुपरवीजन के लिए राजेन्द्र नीखरा और रवि घुटेरिया को टीम लीडर नियुक्त किया गया है, जो निर्धारित योग्यता नहीं रखते है। जांच के बाद राज्य सरकार ने अयोग्य टीम लीडर को हटाकर दोनों कंपनियों का ठेका निरस्त कर दिया। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने तर्क दिया कि सरकार ने अयोग्य टीम लीडरों को अलग कर दिया है, लेकिन अयोग्य टीम लीडरों की नियुक्ति का अनुमोदन करने पर संविदा इंजीनियरिंग इन चीफ जीपी कटारे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। पुरातत्व विभाग, केंद्र व राज्य शासन को जवाब पेश करने के निर्देश दिए।

बक्सवाहा के जंगल में खनन से पुरातात्विक संपदा नष्ट होने का मामला : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बक्सवाहा के जंगल में खनन से पुरातात्विक संपदा नष्ट होने के मामले में पुरातत्व विभाग, केन्द्र व राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किए है।

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि बक्सवाहा के जंगल में पाषाण युग की राक पेटिंग मिली है। इसके अलावा चंदेल और कल्चुरी युग की मूर्तियां व स्तम्भ भी मिले है। यह सर्वे पुरातत्व विभाग जबलपुर ने 10 से 12 जुलाई के बीच किया था। याचिका में बक्सवाहा में हीरा खनन पर रोक लगाने की मांग की है।

एस्सेल माइनिंग कंपनी ने दायर की हस्तक्षेप याचिका : इस मामले में एस्सेल कंपनी की ओर से हस्तक्षेप याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने हस्तक्षेप याचिका पर जवाब पेश के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया है। हाई कोर्ट ने एस्सेल कंपनी को संबंधित पक्षों को तीन दिन के भीतर हस्तक्षेप याचिका की कॉपी देने के लिए कहा है।

Posted By: Ravindra Suhane