मप्र हाई कोर्ट ने एएसआइ को पदावनत कर हवलदार बनाने का आदेश किया निरस्त

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 02:10 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एएसआइ को पदावनत करने का आदेश अनुचित पाते हुए निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति संजय दि्वेदी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता छतरपुर निवासी राम सुंदर शर्मा की ओर से अधिवक्ता शिव शंकर त्रिपाठी ने पक्ष रखा।

उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का वायरलैस सेट ड्यूटी के दौरान गुम हो गया था। इस मामले में विभागीय जांच शुरू की गई। प्राथमिक चरण में वेतनवृदि्ध रोक दी गई। बाद में मामले के अन्य आरोपित पुलिस कर्मियों को राहत दे दी गई, लेकिन याचिकाकर्ता को पदावनत कर दिया गया। एएसआइ से हवलदार बनाए जाने के इस अपमानजनक रवैये के खिलाफ याचिकाकर्ता हाई कोर्ट की शरण में चला आया। पूर्व में उसे स्टे मिल गया था। इस वजह से वह एएसआइ के रूप में सेवा देता रहा। लेकिन पदावनत करने की तलवार लटकी हुई है।

लिहाजा, अनुचित आदेश निरस्त किए जाने पर बल दिया गया है। हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद पदावनत करने के आदेश को अनुचित पाते हुए याचिकाकर्ता के हक में राहतकारी आदेश पारित कर दिया।

अतिक्रमण मामले में नोटिस : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर के माढ़ोताल में अतिक्रमण व अवैध निर्माण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन, कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर और अधारताल संभाग के तहसीलदार काे नोटिस जारी किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है। मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान जनहित याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी सीमा अहिरवार सहित अन्य की ओर से पक्ष रखा गया।

दलील दी गई कि मास्टर प्लान के प्रविधानों को दरकिनार करते हुए संभवत: शहर का सबसे बड़े तालाब माढ़ोताल के 30 मीटर दायरे में सैकड़ों अवैध निर्माण और अतिक्रमण किए गए हैं।मास्टर प्लान में स्पष्ट प्रविधान है कि तालाब के 30 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसके बावजूद माढ़ोताल के खसरा नंबर 175, 119/3, 120/1, 120/2, 120/3 में सैकड़ों अवैध निर्माण और अतिक्रमण किए गए हैं। अवैध निर्माण और अतिक्रमण से माढ़ोताल में प्रदूषण भी बढ़ गया है। मास्टर प्लान में यह क्षेत्र पौधारोपण के लिए अधिसूचित किया गया है। इस मामले में जनहित याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी रवैये के खिलाफ व्यापक जनहित में हाई कोर्ट चले आए हैं।जनहित याचिका के साथ दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। इसके जरिये अतिक्रमणों व अवैध निर्मााणों को रेखांकित किया गया है।

Posted By: Ravindra Suhane