मप्र हाई कोर्ट ने दिए लंबित शिकायत का निराकरण करने के निर्देश

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 11:17 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कोटवार वेलफेयर सोसायटी संघ के प्रदेशाध्यक्ष नरसिंहपुर निवासी लोचन प्रसाद चडार की जनहित याचिका पर आदेश सुरिक्षत कर लिया है। प्रसासनिक न्यायाधीश शील नागू व जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की युगलपीठ ने पूर्व में प्रस्तुत शिकायत का नियमानुसार निराकरण करने के भी निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान जनहित याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा, शिवम शर्मा व अमित स्थापक ने रखा। उन्होंने दलील दी कि कोटवारों को मालगुजारी प्रथा के जमाने में जीवन-यापन के लिए कृषि कार्य हेतु सेवाभूमि दी गई थी। मुख्यमंत्री ने 30 जून, 2007 को कोटवार पंचायत में घोषणा की थी कि पात्रता परीक्षण करते हुए कोटवारों को सेवाभूमि का मालिकाना हक दिया जाएगा। इसके बावजूद मनमाने तरीके से कोटवारों को सेवाभूमि से वंचित करने का रवैया अपनाया जा रहा है। तीन मार्च, 2010 और 14 अक्टूबर, 2014 को कोटवारों के हित में परिपत्र जारी किए गए। 11 फवरी, 2013 को विधानसभा में करेली के विधायक सुनील जायसवाल ने इस संबंध में प्रश्न भी उठाया था। इस दौरान सरकार के कोटवारों संबंधी परिपत्र का हवाला दिया गया था। इसके विपरीत 28 फरवरी, 2017 को सचिव राजस्व और अगस्त, 2021 में राजस्व मंडल, ग्वालियर द्वारा परिपत्र जारी कर कोटवारों को सेवाभूमि से वंचित करने की तैयारी कर ली गई है। इससे कोटवार परेशान हो गए हैं। इसीलिए संघ की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। पूर्व में भी कई कोटवार स्वतंत्र याचिका दायर कर चुके हैं। बहस के दौरान दलील दी गई कि कोटवार सेवा भूमि पर खेती कर आजीविका चल रहे हैं।

Posted By: Ravindra Suhane