MP Highcourt: हाई कोर्ट ने पूछा- सड़कों पर भटकने वाले गोवंश के संबंध में क्या कर रही सरकार

Updated: | Fri, 24 Sep 2021 08:10 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि प्रदेश के शहरों की सड़कों पर निराश्रित भटकने वाले मवेशियों व गोवंश के संरक्षण तथा गोशालाओं की स्थापना के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने सरकार से 20 जनवरी, 2021 को जारी आदेश का पालन कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

सड़कों पर देखा झुंड: कामधेनु गोरक्षा राष्ट्रीय दल के गोरखपुर, जबलपुर निवासी बृजेंद्र लक्ष्मी यादव की ओर से जनहित याचिका दायर कर कहा गया कि 12 नवंबर 2019 को उन्होंने तेंदूखेड़ा से दमोह के बीच में करीब दो हजार गोवंश के पशुओं का झुंड देखा, जिसे कुछ लोग हांक कर ले जा रहे थे। पूछने पर जानकारी मिली कि ग्वालियर जिले के श्योपुर से इन पशुओं को बालाघाट के व्यापार मेले में बेचने के लिए ले जाया जा रहा है। याचिका में कहा गया कि जिस तरीके से श्योपुर से लगातार इतने बड़े झुंड में पैदल चलाते हुए इन पशुओं को ले जाया गया, वह पशु क्रूरता अधिनियम व गोवंश प्रतिषेध अधिनियमों के खिलाफ व अमानवीय है। इन पशुओं में से कई बीमार, घायल भी थे। पशु क्रूरता अधिनियम का हवाला देते हुए उन्होंने तेंदूखेड़ा पुलिस थाने में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गोशालाओं की दशा पर चिंता : इसी तरह हेड पोस्ट आफिस के समीप साउथ सिविल लाइंस निवासी युवती पूर्णिमा शर्मा ने 24 अक्टूबर, 2019 को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधिपति को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया कि विभिन्न हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ने आवारा पशुओं को सडक़ों पर विचरण करने से रोकने के निर्देश दिए हैं। इसके चलते इन मूक पशुओं पर स्थानीय निकाय के कर्मी क्रूरता करते हैं। कांजी हाउस, गोशालाओं मे किसी तरह की सुविधाएं नहीं हैं। यहां रखे गए मवेशियों की दशा अत्यंत दयनीय है। नगर निगम जबलपुर ने तिलवारा में गोसेवा केंद्र स्थापित किया है। लेकिन यहां भी लगभग एक हजार मवेशी हैं। इनके लिए यह जगह बहुत ही छोटी है। कांजी हाउस, गोशाला के मवेशियों के खाने, पीने, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। रोजाना तिलवारा के गौसेवा केंद्र में पांच-दस मवेशी असमय काल के गाल में समा रहे हैं। निगम में इनके लिए डाक्टर तक नहीं हैं। इसकी शिकायत सीएम हेल्प लाइन तक की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दोनों मामलों की हाई कोर्ट में एक साथ सुनवाई हुई।दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं मवेशी : अधिवक्ता योगेश धांडे ने दलील दी कि गोवंश की तस्करी करने वालों से पुलिस की मिलीभगत है। व्यापार मेला के नाम पर ले जाए जाने वाले पशुओं की खरीद-फरोख्त का कोई रिकार्ड नहीं रखा जाता। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में गोवंश का बुरा हाल है। आए दिन सड़क पर आवारा भटकने वाले गोवंश के मवेशियों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। राज्य सरकार ने 3000 गोशालाओं के निर्माण की बात कही। लेकिन अभी तक अधिकांश का काम नहीं हुआ। 20 जनवरी को कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि राज्य के महानगरों में निराश्रित सड़कों पर भटकने वाले गोवंश के मवेशियों के संरक्षण और उनके मालिको पर कार्रवाई की क्या व्यवस्था है। गुरुवार को इस आदेश के परिपालन के लिए सरकार की ओर से समय मांगा गया।

Posted By: Brajesh Shukla