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MP High Court News: बक्सवाहा में वन्य प्राणियों के लिए बने कॉरिडोर में खनन के लिए नहीं ली एनटीसीए की इजाजत

Updated: | Tue, 22 Jun 2021 08:43 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने केंद्रीय नेशनल टाइगर कन्जर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) व नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ को नोटिस जारी कर पूछा कि क्या नौरादेही वन्यप्राणी अभ्यारण्य और पन्ना टाइगर रिज़र्व के बीच वन्य प्राणियों के आवागमन के लिए बनाए गए कॉरिडोर में हीरा उत्खनन की अनुमति दी गई है? कोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार व आदित्य बिड़ला ग्रुप की एस्सेल माइनिंग कंपनी को भी यह बताने के लिए समय दिया कि बक्सवाहा में हीरा खनन के लिए पेड़ों की कटाई की अनुमति कैसे दी गई ? मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने जवाब के लिए चार सप्ताह का समय देकर अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की है।

50 हजार करोड़ के हीरे हासिल करने ढ़ाई लाख पेड़ों को काटने की तैयारी: फरीदाबाद, हरियाणा निवासी रामित बाबू, पुणे महाराष्ट्र के वकील हर्षवर्धन राजाराम मेलान्ता व उप्र के गौतम बुद्ध नगर निवासी पंकज चौधरी की ओर से याचिका दायर की गई। इसमें कहा गया कि राज्य के छतरपुर इलाके में बक्सवाहा जंगल के बीच दबे करीब 50 हजार करोड़ के हीरे हासिल करने के लिए ढ़ाई लाख से अधिक हरे-भरे पेड़ों का कत्लेआम करने की तैयारी कर ली गई है। हीरा हासिल करने की सनक में रिपोर्ट तक बदली जा रही हैं। पहले के सर्वे में इस जंगल में जो जंगली प्राणी पाए जाते थे, वे अब नदारद बताए जा रहे हैं। अधिवक्ता अंशुमन सिंह ने तर्क दिया कि एनटीसीए की गाइडलाइन के अनुसार दो संरक्षित वन क्षेत्रों को जोड़ने वाले कॉरिडोर में निर्माण या खनन जैसी कोई भी गतिविधि प्रतिबंधित है। इसके लिए नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ व एनटीसीए की अनुमति आवश्यक है। लेकिन इस मामले में यह अनुमति नही ली गई। आग्रह किया गया कि उक्त जंगल मे उत्खनन की इजाजत निरस्त की जाए।

दोनों याचिकाओ की सुनवाई एक साथ हुई: वहीं एक अन्य याचिका में अधिवक्ता सुजीत सिंह सैनी ने आग्रह किया कि उक्त उत्खनन के लिए पेडों की कटाई की इजाजत निरस्त करने के निर्देश दिए जाएं। दोनों की सुनवाई साथ की गई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने एनटीसीए व नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्डलाइफ को भी अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए।

Posted By: Sunil Dahiya
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