जबलपुर में सायबर ठगों पर पुलिस का प्रहार, 10 लाख से ज्यादा रकम लौटाकर दिया गणतंत्र दिवस का उपहार

लाखों रुपये की ठगी करने वाले सायबर अपराधियों के मंसूबों पर जबलपुर पुलिस ने पानी फेर दिया।

Updated: | Thu, 27 Jan 2022 05:19 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। एटीएम क्लोनिंग, मोबाइल लिंक, एनीडेस्क एप और मोबाइल सिम नवीनीकरण के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले सायबर अपराधियों के मंसूबों पर पुलिस ने पानी फेर दिया। सायबर अपराधियों ने चार अलग-अलग मामलों में 16 लाख 82 हजार रुपये की ठगी की थी। राज्य साइबर पुलिस की जबलपुर इकाई ने तत्परता पूर्वक कार्रवाई करते हुए 10 लाख 3 हजार 780 रुपये से खाताधारकों को वापस कराते हुए गणतंत्र दिवस का उपहार दिया। राज्य सायबर पुलिस जोन जबलपुर के एसपी लोकेश सिंहा ने गुरुवार को घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डीएसपी आरके मालवीय, निरीक्षक विपिन ताम्रकार समेत सायबर टीम के जवानों ने बिना विलंब किए ठगी की शिकायतों पर कार्रवाई की, जिसके चलते पीड़ितों को लाखों रुपये वापस मिल सके।

पहली घटना-एटीएम क्लोनिंग से ठगी-

अधारताल निवासी सेवानिवृत्त शिक्षिका के बैंक खाते से एटीएम क्लोनिंग के माध्यम से तीन लाख रुपये

एटीएम के माध्यम से आहरित किए गए थे। महिला शिक्षक ने भारतीय स्टेट बैंक अधारताल शाखा में खाता खुलवाया था। जिसका एटीएम उनके पास था। फिर उनके खाते से रकम निकाल ली गई थी। शिकायत जांच के दौरान जिन एटीएम बूथों से ठगी की राशि आहरित की गई थी उनके सीसीटीवी फुटेज प्राप्त किए गए। रकम छत्तीसगढ़ के एक शहर में अलग-अलग एटीएम बूथ से निकालने की जानकारी मिलने पर सायबर पुलिस ने बैंक अधिकारियों से पत्राचार किया। सायबर पुलिस ने बैंक अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीड़ित महिला शिक्षक को तीन लाख रुपये लौटाए जाएं। क्योंकि खाताधारक की गलती नहीं बल्कि एटीएम क्लोनिंग से उसके खाते से रकम निकाली गई है। अंततः बैंक को तीन लाख रुपये महिला शिक्षक के खाते में जमा करना पड़ा।

दूसरी घटना-मोबाइल पर लिंक भेजकर ठगी-

ग्वारीघाट निवासी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी के मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से लिंक भेजकर सायबर ठगों ने खाते से नौ लाख रुपये पार कर दिए थे। सैन्यकर्मी ने बैंक लोन के लिए आनलाइन प्रक्रिया अपनाई थी। सैन्यकर्मी ने निजी बैंक में खाता खुलवाया था। जिसमें सेवानिवृत्ति उपरांत मिले लाखों रुपये जमा थे। जालसाज ने खुद को उसी बैंक का कर्मचारी बताकर उन्हें झांसे में लिया और चंद दिनों में लोन स्वीकृत कराने को कहा। सैन्यकर्मी और जालसाज में बातचीत होती रही। जालसाज ने सैन्यकर्मी के मोबाइल पर लिंक भेजी। उसने कहा कि लिंक को क्लिक करते ही लोन की रकम उनके खाते में पहुँच जाएगी। जालसाज द्वारा भेजी गई लिंक को सैन्यकर्मी ने खोला और उसमें अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कर दी।जिसके बाद उसके खाते से नौ लाख रुपये निकल गए। सैन्यकर्मी ने सायबर पुलिस को घटना की जानकारी दी। सायबर पुलिस अधिकारियों ने अवैध ट्रांजेक्शन की जानकारी के लिए संबंधित पेमेंट गेटवे नोडल अधिकारी, बैंक मैनेजर को पत्राचार व दूरभाष के माध्यम से तत्काल संपर्क किया। अवैध ट्रांजेक्शन को रोकने एवं ट्रांजेक्शन की जानकारी प्रदान करने के लिए निर्देशित किया। फलस्वरूप आवेदक के बैंक खाते से आहरित ठगी की राशि नौ लाख रुपये में से 3 लाख 99 हजार 999 रुपये आवेदक के खाते में वापस कराए जा सके।

तीसरी घटना-मोबाइल सिम नवीनीकरण के नाम पर ठगी-

बीएसएनएल की सिम के दस्तावेज का नवीनीकरण करने का झांसा देकर जालसाजों ने सेवानिवृत्त प्रोफेसर से दो लाख रुपये ठग लिए थे। रकम ठगने के लिए प्रोफेसर को मोबाइल पर लिंक भेजी गई थी। लिंक भेजते ही खाते से दो लाख रुपये निकल गए थे। सायबर पुलिस टीम की सजगता से उन्हें दो लाख रुपये वापस मिल गए। जानकारी के अनुसार सिविल लाइन निवासी सेवानिवृत्त प्रोफेसर को एसएमएस के माध्यम से जालसाज ने बीएसएनएल सिम के दस्तावेज एक्सपायर होने की जानकारी दी थी। जिनका वेरीफिकेशन कराने के नाम पर जालसाज ने उनके मोबाइल पर लिंक भेजी थी। लिंक को क्लिक करने के बाद एक पेज ओपन हुआ।जिसपर उन्होंने अपनी व्यक्तिगत जानकारी दर्ज कर दी। जिससे तत्काल बाद उनके बैंक खाते से दो लाख रुपये निकल गए थे। सायबर पुलिस टीम ने शिकायत मिलते ही संबंधित पेमेंट गेटवे नोडल अधिकारी, बैंक मैनेजर से संपर्क किया। जिसके बाद सेवानिवृत्त प्रोफेसर के दो लाख रुपये वापस हो पाए।

चौथी घटना-एनीडेस्क एप डाउनलोड कराकर ठगी-

जिला सीधी निवासी सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी ने कुछ सामग्री खरीदी थी। क्रेडिट कार्ड के माध्यम से उसने पांच हजार रुपये का भुगतान किया था। खाते से रकम निकली परंतु संबंधित के बैंक खाते में नहीं पहुँची। सैन्यकर्मी ने भारतीय स्टेट बैंक के टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद सैन्यकर्मी से मोबाइल पर जालसाज ने संपर्क किया। उसने सैन्यकर्मी के मोबाइल पर एनीडेस्क एप डाउनलोड कराया और पांच बार में 2 लाख 82 हजार रुपये बैंक खाते से पार कर दिए। शिकायत मिलने पर सायबर टीम ने बैंक अधिकारियों से संपर्क किया। जिसके बाद त्वरित कार्रवाई कर बैंक खाते से आहरित रकम में से एक लाख 3 हजार 780 रुपये वापस कराए गए।

Posted By: Ravindra Suhane
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