School Fees: फीस के अभाव में स्कूल बदल रहे बच्चों को नहीं मिल रही टीसी

Updated: | Thu, 23 Sep 2021 12:40 PM (IST)

School Fees: जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। स्कूलों की फीस देने के अभाव में बच्चों के स्वजन उनको स्कूल से निकालकर शासकीय स्कूलों में भर्ती करना शुरू कर रहे है। लेकिन निजी स्कूल संचालक अपनी मनमानी करते हुए ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं दे रहे है, जिससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। बच्चों की पढ़ाई में कोई नुकसान नहीं हो इसके लिए बच्चों के ट्रांसफर सर्टिफिकेट बिना उनके स्वजन को परेशान किए दिए जाने चाहिए। यह मांग मध्यप्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के सदस्याें ने कलेक्टर से की है।

मध्यप्रदेश जागरूक अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के जिला अध्यक्ष राबर्ट मार्टिन ने आरोप लगाते हुए बताया कि बच्चों के स्वजन फीस देने में असमर्थ होने के कारण बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं। पिछले 2 सालों से लाक डाउन की वजह से इन बच्चों के पालक आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं यही वजह है कि वह नामी प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस देने में असमर्थ हैं। ऐसे में जब वह निजी शालाओं से निकलकर शासकीय शालाओं में प्रवेश लेना चाहते है। तो निजी शालाओं के संचालक ट्रांसफर सर्टिफिकेट देने से मना कर देते हैं। यही कारण है कि उन बच्चों को बिना टीसी के अन्य स्कूलों में एडमिशन नहीं मिल पाता।

दूसरे स्कूल में प्रवेश के लिए नहीं है टीसी: संघ ने आगे बताया कि ऐसे दर्जनों छात्र हर दिन शासकीय स्कूलों में प्रवेश के लिए आते हैं। लेकिन उनके पास टीसी नहीं होती जबकि दूसरे स्कूलों से आने पर ट्रांसफर सर्टिफिकेट होना आवश्यक होता हैं। विद्यार्थी की समस्त जानकारी ट्रांसफर सर्टिफिकेट में दर्शाई जाती है यदि ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं होता तो दूसरे स्कूल में दाखिले में समस्याएं आती हैं। क्योंकि आरटीई राइट टू एजुकेशन के अधिनियम के तहत अनिवार्य शिक्षा के लिए 6 से 14 वर्ष के बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं रखा जा सकता है। लेकिन फीस के अभाव में प्राइवेट स्कूलों के कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। संघ ने आगे बताया कि शासकीय शालाओं के हजारों शिक्षक को ऐसे बच्चों का सर्वे करने के लिए लगाया गया है। जो शाला छोड़ चुके हैं या नहीं पढ़ रहे हैं, लेकिन जब प्राइवेट शालाओं के शिक्षक इन बच्चों की जानकारी लेने जाते हैं तो यह बच्चे प्राइवेट शालाओं में दर्ज तो होते हैं, लेकिन उन्हें फीस जमा नहीं करने की वजह से मैंप नहीं किया जाता जिससे वे पोर्टल में नहीं दिखते यदि यह बच्चे शासकीय शालाओं में प्रवेश करते हैं तो इन बच्चों को प्राइवेट शालाओं द्वारा अनमैप नहीं किया जाता। जिससे वह शासकीय शालाओं में मैप नहीं हो पाते और जब स्वजन निजी स्कूलों से टीसी लेने या फिर अनमैप करने के लिए संपर्क करते हैं तो वह स्वजन से पूर्व की फीस जमा करने को कहते हैं जो कि आर्थिक तंगी से जूझ रहे स्वजन के लिए असंभव होता है।

संघ के जिलाध्यक्ष राबर्ट मार्टिन, दिनेश गोंड, मीनू कांत शर्मा, स्टेनली नारबट, हेमंत ठाकरे, एनोस विक्टर, विनोद सिंह, गुडविन चार्ल्स, प्रकाश मिश्रा, चेतन कुहरे, आसाराम झारिया, संतोष चौरसिया, ईश्वरदत्त पड़रहा, मनीष मिश्रा, अजय मिश्रा, एसबी रजक और अन्य शामिल रहे।

Posted By: Ravindra Suhane