जबलपुर में गंदगी देख साहब ने सिकोड़ी नाक

Updated: | Sun, 05 Dec 2021 03:15 PM (IST)

सुनील दाहिया, जबलपुर। ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत लाल बिल्डिंग पर एकदम सटीक बैठ रही है। दरअसल, लाल बिल्डिंग के अफसर शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने का दंभ तो भरते रहे लेकिन चंद कदम दूर सिविक सेंटर क्षेत्र की सफाई नहीं करवा पाए। गत दिवस जब लाल बिल्डिंग के बड़े साहब ने औचक मुआयना किया तो सिविक सेंटर क्षेत्र सहित प्रियदर्शनी उद्यान के आस-पास से उठती दुर्गंध से साहब की नाक-भौंह सिकुड़ गई। कुछ पल के लिए सांस लेना तक मुश्किल हो गया। गुस्से से तमतमाए साहब ने आनन-फानन में कर्मचारियों को मौके पर तलब कर पहले तो उद्यान की धुलाई करवाई और फिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कचरा, गंदगी को साफ करने की हिदायत दे डाली। साहब का जब हुक्म हुआ तब कहीं जाकर सिविक सेंटर क्षेत्र को झाड़ा-बुहारा गया, नालियों में जमा वर्षों का कचरा निकाला गया। क्योंकि साहब कह गए थे कि वे दोबारा निरीक्षण करने पहुंचेंगे।

अब नहीं रही पहली जैसी दहशत : अतिक्रमण शाखा का अब कोई धनी-धोरी नहीं रहा। शाखा की कमान संभालने वाले दो सहायक आयुक्त में से एक का प्रभार बदल दिया गया तो उनकी जगह बैठाए गए दूसरे सहायक आयुक्त ने कुछ दिन बाद जबलपुर से ही अपना तबादला करवा लिया। अब ले देकर शाखा की कमान विभागीय अधिकारी ही संभाल रहे हैं। यही कारण है कि शहर में जहां चौतरफा अतिक्रमणों का जाल बिछ गया है, फुटपाथ पर कब्जे पर कब्जे हुए पड़े हैं वहीं इन्हें हटाने की कार्रवाई ठंडी पड़ी हुई है। विभागीय गलियारों में ये चर्चा भी सरगर्म है कि अब अतिक्रमण शाखा में वो बात नहीं रही जो पहले थी। पहले तो अतिक्रमणकारियों में इतनी दहशत थी कि वे सेटलमेंट करने आ भी जाया करते थे लेकिन अब तो यहां काेई झांकता भी नहीं। क्योंकि बिना सक्षम अधिकारी के न तो अतिक्रमणकारियों को नोटिस देते बन रहा है न हटाया जा रहा है।

मास्क नहीं तो प्रवेश नहीं, फार्मूला तो अच्छा है: देश में कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रान की दस्तक ने देश, प्रदेश सहित शहर की चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण को हथियार तो मास्क को ढाल निरूपित करते हुए सभी से टीका चक्र पूरा कराने की अपील कर रहा है। वहीं कोरोना से बचने के लिए लाल बिल्डिंग के साहब ने तो ये आदेश ही निकाल दिया कि बिना मास्क दफ्तर में ही प्रवेश ही नहीं मिलेगा। ये भी कहा गया कि अधिकारी-कर्मचारी बिना मास्क के दिखे तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी करो। एक-दो दिन तो साहब के आदेश पर आला अधिकारी मुख्य द्वार पर पहरा देते भी दिखे। जो अधिकारी-कर्मचारी बिना मास्क लगाए पहुंचे उनकी द्वार पर ही लानत-मलानत भी की गई। जानकारों का कहना है कि मास्क नहीं तो प्रवेश नहीं, फार्मूला तो अच्छा है लेकिन इसकी कड़ाई से निगरानी भी हो क्योंकि जब जिम्मेदार मास्क लगाएंगे तभी नागरिक भी उनका अनुसरण करेंगे।

मेट्रो भी चल रहीं आटो की चाल: ‘बगुला चले हंस की चाल’ वाली कहावत तो सुनी है पर मेट्रो यदि आटो की चाल चले तो हैरान होना लाजिमी है। दरअसल, शहर में पुरानी लाल मेट्रो के साथ ही सफेद रंग की छह नई मेट्रो बसें भी सड़कों पर दौड़ने लगी हैं। मेट्रो की संख्या बढ़ने से उन लोगों को राहत मिली है जो आटो की धक्का मुक्की और चालकों की मनमानी से परेशान थे। लेकिन अब मेट्रो भी आटो के नक्शे कदम पर चली पड़ी हैं। निर्धारित बस स्टाप से इतर कहीं भी खड़े हो जाना, बिना मास्क के यात्रियों को ठूंसकर भरना और सड़कों पर सरपट दौड़ना मेट्रो बस चालकों ने भी सीख लिया है। मेट्रो-आटो की चाल देखकर लगता ही नहीं कि मेट्रो पर सरकारी नियंत्रण है। लाल बिल्डिंग के अधिकारी भी मेट्रो की बिगड़ती चाल को अनदेखा कर रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है।

Posted By: Ravindra Suhane