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World Family Day 2021: एक- दूसरे के प्रति बढ़ी संवेदनाओं से अब समाज ले रहा परिवार का रूप

Updated: | Sat, 15 May 2021 09:02 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर, World Family Day 2021 किसी भी विपरीत स्थिति में परिवार का साथ सबसे बड़ा संबल और शक्ति होती है। कुछ ऐसा ही माहौल नजर आ रहा है कोरोना काल में। जहां परिवार के सदस्य तो एक दूसरे के और नजदीक आ ही रहे हैं साथ ही मोहल्ले,पड़ोस,कॉलोनी और समाज के लोग भी एक दूसरे के प्रति संवेदना जता रहे हैं। जिससे समाज एक परिवार के रूप में बंध रहा है। आज विश्व परिवार दिवस पर आइए जानते हैं शहर के कुछ परिवारों के सदस्यों और समाजशास्त्री से की कोरोना ने कैसे परिवार की अवधारणा को बदला है साथ ही हम वसुधैवकुटुम्बकं की धारणा की ओर बढ़ रहे हैं।

साथ पाकर बहुत खुश : समाज शास्त्री और सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष रादुविवि डॉ सी एसएस ठाकुर ने बताया कि समाज में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव देखने मिल रहे हैं। शुरुआत में जब लाकडाउन हुआ था तो परिवार के लोग एक - दूसरे का साथ पाकर बहुत खुश थे। लेकिन अब जब इस माहौल ने लोगों की दिनचर्या को बहुत प्रभावित कर दिया है तो इसके नकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। कहीं- कहीं परिवार बिखर भी रहे हैं। खास तौर पर बच्चों पर इस माहौल का अच्छा असर नहीं पड़ रहा है। ठीक इसके विपरीत यह भी देखने मिल रहा है कि लोग अपने परिवार से बाहर निकलकर अभावग्रस्त लोगों की मदद के लिए आगे बढ़ रहे हैं। संवेदनाएं जता रहे हैं। वास्तव में भारतीय लोगों की यही अपनत्व के भाव उन्हें हर समस्या से निकलने में मदद करती है। कुछ ऐसा ही भाव कोरोना काल में देखने मिल रहा है। जहां पूरे समाज का दर्द सभी का दर्द है। यही वास्तव में परिवार है।

परिवार के साथ ने बहुत हिम्मत दी: शिवेंद्र परिहार ने बताया कि उनका सयुंक्त परिवार है। सभी लोग साथ में रहते हैं। खास तौर पर कोरोना काल में परिवार के साथ ने बहुत हिम्मत दी है। जब भी कोई नकारात्मक बात पता चलती है। सभी एक- दूसरे की हिम्मत बढाते हैं। कभी कोई किसी को अकेला या निराश नहीं होने देता।

कम से कम बोरियत नहीं होती: डॉ शिप्रा सुल्लेरे ने बताया कि उनका भी संयुक्त परिवार है। उन्हें लगता है इस कठिन समय में लोगों को परिवार का महत्व समझ में आया है। जिनके घर में सिर्फ दो लोग रहते हैं वो फोन करके बोलते हैं कि ऐसे समय में तो परिवार में ज्यादा लोग होना चाहिए। कम से कम बोरियत नहीं होती। अकेलापन नहीं लगता। माया सिन्हा का कहना है कि परिवार में भले ही चार लोग हों लेकिन यदि वो इस समय एक साथ रह रहे हैं तो आधी परेशानी तो ऐसे ही ठीक हो जाती है। कम से कम चिंता नहीं रहती। इसलिए हम लोगों ने अपने बेटा- बहू जो पूना में जॉब के लिए रह रहे थे उन्हें बुलवा लिया। ताकि साथ में रह सकें।

Posted By: Sunil Dahiya
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