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Narmada River Jabalpur: नर्मदा में पाए जाने वाले जलजीव स्वत: ही कम करते हैं प्रदूषण

Updated: | Thu, 26 Nov 2020 10:29 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। अपने उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर भड़ूच तक नर्मदा नदी 1312 किलोमीटर की दूरी तय करती है। सिर्फ जबलपुर में ही नर्मदा का प्रवाह 60 किलोमीटर है। नर्मदा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर सभी चिंतित हैं। नर्मदा में बढ़ते प्रदूषणों के कारणों व उपायों पर काम भी हो रहा है। इसी प्रयास में होमसाइंस कॉलेज में अतिथि विद्वान के तौर पर कार्यरत अर्जुन शुक्ला ने अपने शोध में किसी रसायन नहीं बल्कि नर्मदा में पाए जाने वाले जल जीवों को ही प्रदूषण दूर करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। शोध में आए परिणामों के अनुसार ये जलजीव स्वत: ही नर्मदा के जल में पाए जाने वाले प्रदूषण को कम करते हैं।

अर्जुन ने अपने शोध में नर्मदा के जलजीवों की 245 प्रजातियों की खोज की है। इनमें से 45 प्रजातियां प्रदूषण का कम या अधिक होना दर्शाती हैं। खास तौर पर नर्मदा में एनालिडा, आर्थोपोडा और मोलस्का प्रजातियों के जीव पाए जाते हैं। ये तीनों प्रजातियों के जीवों की संख्या का कम होना और ज्यादा होना प्रदूषण की मात्रा को दर्शाता है। शंख, घोंघा ये सभी मोलस्का प्रजाति के जलजीव हैं। इनका पाया जाना ऑक्सीजन का कम या ज्यादा होना बताता है। इसके साथ ही केंचुए जो एनालिडा प्रजाति के हैं इनका पानी में होना दर्शाता है कि पानी में कीटनाशक व फर्टिलाइजर ज्यादा हैं। टिड्डे, छोटे-छोटे कीट ये आर्थोपोडा के जीव हैं। इनका कम होना ऑर्गेनिक मटेरियल, क्षारीयता को बताता है। झींगा मछली पानी की क्षारीयता व अम्लीयता को दर्शाती है। साथ ही झींगा मछली का होना पानी के तापमान को भी नियंत्रित करता है।

नर्मदा पर यह शोध शहर के तीन स्थलों पर किया गया। जिसमें बरगी, ग्वारीघाट व भेड़ाघाट शामिल हैं। शोध के बाद आए परिणामों में ग्वारीघाट सबसे ज्यादा प्रदूषित है। जहां सबसे ज्यादा स्टोन फ्लाई व मरे हुए मोलस्का मिल रहे हैं। जो बताते हैं कि ऑक्सीजन की मात्रा कम है। यहां नदी का तेज बहाव न होना भी प्रदूषण का बड़ा कारण है। वहीं भेड़ाघाट में प्रदूषण सबसे कम हैं क्योंकि यहां के पानी में तेज बहाव है। वहीं बरगी में क्रूज के कारण पानी की सतह पर तेल जमा होता है। इसलिए पानी के अंदर मोलस्का मर रहे हैं। तेल के कारण पानी के अंदर ऑक्सीजन नहीं पहुंच पा रही है।

अर्जुन शुक्ला बताते हैं की ऐनेलिडा मोलस्का और आर्थोपोडा को सामूहिक रूप से बेंथोस कहा जाता है |नर्मदा जल को स्वच्छ करने वाली बेंथोस की 55 फैमिली इस समय नदी में एक्टिव हो गई हैं| अंतर्राष्ट्रीय पैमाने के अनुसार नर्मदा जल ए ग्रेड का हो गया है। इस समय बेंथोस की 55 फैमिली के 758 जीव अस्तित्व में हैं और आशा से अधिक सक्रिय हैं। सामान्य श्रेणी में आने वाले जीव 47% दुर्लभ तथा अति दुर्लभ जीव भी बीस से पच्चीस परसेंट दिखाई देने लगे हैं| यह सारा परिवर्तन लॉकडाउन के कारण नर्मदा में दिखाई दे रहा है| इसके साथ ही नर्मदा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उसका भी परिणाम है|

Posted By: Ravindra Suhane
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