जबलपुर की सफाई में हावी ठेका प्रणाली निकाल रही स्वच्छता का दम, लागू नहीं हो पा रहा इंदौरी माडल

Updated: | Tue, 30 Nov 2021 01:43 PM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम की गलत नीतियों के कारण ही स्वच्छ सर्वेक्षण में जबलपुर को हर बार मुंह की खानी पड़ रही है। स्वच्छ शहरों की रैकिंग में जबलपुर पिछले तीन वर्षों में टाप-10 की सूची में जगह नहीं बना पाया है। स्वच्छता की परीक्षा में 2019 में जबलपुर 25वें, 2020 में 17वें और 2021 की रैकिंग में 20 वें स्थान पर रहा। क्योंकि अधिकारियों द्वारा सफाई व्यवस्था में लागू की जाने वाली ठेका प्रणाली के कारण सफाई में सुधार तो नहीं आ पा रहा उल्टा नगर निगम को आर्थिक रूप से सालाना लाखों रुपये की चपत लग रही है।

नगर निगम चाहे तो ठेका प्रथा को किनारे कर इंदौरी माडल लागू कर अपने मौजूद संसाधनों का उपयोग कर इंदौर की तर्ज पर सफाई व्यवस्था में सुधार ला सकता है। लेकिन ठेका और कमीशन के चक्कर में अधिकारी ठेके का मोह छोड़ नहीं पा रहे हैं। जबकि नगर निगम के पास मानव संसाधन से लेकर मशीनरी सहित पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है।

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ऐसा है नगर निगम का ठेका प्रेम-

पहले एस्सेल को दिया ठेका: नगर निगम के ठेका प्रेम को अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने पहले वर्ष 2016 में डोर टू टू कचरा कलेक्शन का ठेका एस्सेल कंपनी को दिया। लेकिन सफाई में सुधार नहीं अा पाया। निगम पिछले चार वर्षों तक एस्सेल से ही काम लेता रहा। हर महीने करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान भी करता रहा। कंपनी को अब टर्मिनेट कर दिया गया है।

फिर पांच समितियों को बांटा शहर: फरवरी 2021 में नगर निगम निगम ने शहर के सभी 16 संभागों में अलग-अलग क्लस्टर में बांट कर पांच सफाई ठेका कंपनियों मां नर्मदा सफाई संरक्षक एंड लेबर कांटेक्टर को ऑपरेटिव सोसायटी, मां नर्मदा सांई सेवा समिति, प्रियांसी कंस्ट्रक्शन एंड फेसिलिटी श्री बर्फानी सिक्युरिटी और अल्ट्रा क्लीन एंड केयर कंपनी को सफाई का ठेका दिया गया है। बावजूद इसके सफाई में आपेक्षित सुधार नहीं आ रहा। कंपनियों की लापरवाही के चलते मई 2021 में निगमायुक्त संदीप जीआर ने तीन ठेकेदारों को नोटिस भी जारी किए थे।

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इंदौर अपने संसाधनों के बल पर अव्व्ल: हीं इसके उल्ट इंदौर अपने मौजूद संसाधनों के बल पर पिछले पांच वर्षों से स्वच्छ सर्वेक्षण में सिरमौर बना हुआ है। यहां करीब 1500 कालोनी, 200 से ज्यादा बड़े मार्केट हैं। हर दिन लगभग 1100 टन कचरा निकलता है। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की गाड़ियां समय पर पहुंचती हैं और हर प्रकार के कचरे को अलग-अलग एकत्र करती हैं। कचरा प्रबंधन और प्रोसेगिंग की क्षेत्रवार छोटी इकाइयों पर जोर दिया जाता है। सफाई कार्य की नियमित निगरानी की जाती है।

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ठेका प्रणाली पर टिकी सफाई

- 79 वार्ड हैं शहर में

- 1400 नियमित सफाई कर्मचारी नगर निगम के

- 2000 ठेके के कर्मचारी लगे

- 2 करोड़ रुपये लगभग हर माह किया जा रहा खर्च ठेका के कर्मचारियों पर

- 3 करोड़ 50 लाख लगभग नियमित कर्मचारियों के वेतन में हो रहे खर्च

- 1 करोड़ 98 लाख रुपये डोर टू डोर कचरा कलेक्शन में खर्च हो रहे

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क्या कहते हैं जिम्मेदार:

शहर की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शहर को पांच जोन में बांट कर अलग-अलग समितियों को सफाई की जिम्मेदारी दी गई है। अब इसकी सघन निगरानी की जा रही है। 2022 के स्वच्छ सर्वेक्षण में शहर नया मुकाम हासिल करेगा।

भूपेंद्र सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम

Posted By: Ravindra Suhane