Water Supply in Jabalpur: 60 साल पुराने जर्जर टैंक से तीन लाख घरों में हो रही मटमैले पानी की आपूर्ति

Updated: | Mon, 20 Sep 2021 06:45 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर की करीब तीन लाख आबादी को पीने का पानी पहुंचाने वाला कुलीहिल टैंक छह दशक पूरे कर चुका है। 60 वर्षों पुराने टैंक की छत इतनी जर्जर हो गई कि स्लेब का मलबा टूट कर उसमें समा रहा है। कमजोर स्लेब होने के कारण टैंक की सफाई भी अच्छे से नहीं हो पा रही। आधी-अधूरी सफाई के बीच लोगाें को पीने के लिए टैंक के गंदे पानी की सप्लाई की जा रही है। ऐसा नहीं है कि टैंक की मरम्मत कराने या नई टंकी बनाने की सुध न ली गई हो। अमृत योजना के तहत करीब 20 करोड़ रूपये टैंक के जीर्णोद्वार के लिए स्वीकृत भी किए गए। लेकिन नगर निगम के जिम्मेदार इस राशि का उपयोग दूसरी टंकी बनाने में खर्च कर दिए।

टूट कर गिर रहा मलबा, समा रही गंदगी: कांचघर से लेकर घमापुर व आसपास के करीब 16 वार्डों के करीब तीन लाख घरों को पिछले कई सालों से गंदा पानी पिलाया जा रहा है। क्योंकि कुली हिल टैंक की छत पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है। स्लैब की राड पूरी तरह से गल चुकी है। छत का मलबा टूट कर पानी में समा रहा है। छत पर झाड़ू न लगने से कचरा, गंदगी भी पानी में मिल रही है। मलबे और गंदगी से अटे टैंक का गंदा पानी पीने के लिए वार्डों में सप्लाई किया जा रहा है। टैंक की देखरेख कर रहे निगम कर्मचारियों की माने से टैंक की छत इतनी कमजोर हो चुकी है कि कभी भी कोई हिस्सा टूट सकता है। इसलिए टैंक की सफाई तो दूर छत का कचरा साफ करने झाड़ू तक नहीं लगा पा रहे हैं।

ऐसा है टैंक का ऐसा है इतिहास

- 1959 में कुलीहिल टैंक का उद्घाटन तत्कालीन राजस्व व स्वायत मंत्री भगवंतराव मंडलोई ने किया था।

- भवानी प्रसाद तिवारी तत्कालीन नगर अध्यक्ष थे।

- 14 फीट की क्षमता, 10 फीट ही भर रहा

- कुलीहिल टैंक की क्षमता 14 फीट यानी 15 लाख गैलन है।

- परियट और ललपुर से टैंक सुबह-शाम भरा जाता है

- टैंक की छत जर्जर होने के कारण 10 फीट पानी ही भरा जा रहा है।

---

इन वार्डों में होती है पानी की सप्लाई: कांचघर, हनुमान टोरिया, बाबाटोला, श्यामाप्रसाद मुकर्जी, द्वारका नगर, सेठगोविंददास, भानतलैया, ठक्करग्राम, आचार्य विनोवा भावे आदि वार्डों के करीब 2 लाख घरों को पानी सप्लाई किया जाता है।

------------

कुलीहिल टैंक सबसे बड़ा और सबसे पुराना है। टैंक मरम्मत और अमृत योजना के तहत जीर्णोद्धार के लिए राशि भी स्वीकृत हुई थी लेकिन नगर सत्ता ने ध्यान नहीं दिया। कभी भी पूरा स्लैब टैंक में समा सकता है।

संजय साहू, निवर्तमान पार्षद

Posted By: Ravindra Suhane