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Jabalpur High Court News: सब्जी वाले ने तराजू देने से मना किया तो पुलिस वाले उलझ गए बाद में झूठे केस में फंसा दिया

Updated: | Sat, 08 May 2021 06:32 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। सतना जिला अंतर्गत मैहर निवासी सब्जी विक्रेता प्रभुदयाल पटेल अपनी दुकान पर सब्जी बेच रहा था। इसी दौरान कुछ पुलिस वाले आए और तराजू मांगने लगे। उसने सौदे के समय तराजू देने से मना किया तो बहस करने लगे। गाली-गलौच मारपीट तक पहुंच गई। इस घटना से नाराज पुलिस वालों ने गांजा तस्कर अनूप जायसवाल उर्फ जस्सा की गैंग को 95 किलोग्राम अवैध गांजा सहित गिरफ्तार करने के बाद सब्जी विक्रेता को भी मामले में आरोपित बना लिया। जबकि हकीकत यह है कि वह घटना स्थल पर मौजूद नहीं था।

कोर्ट ने राहत दी: आवेदक प्रभुदयाल की ओर से अधिवक्ता संदीप जैन ने उच्च न्यायालय में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मुखबिर की सूचना पर मैहर पुलिस ने दबिश दी तो जस्सा की गैंग ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग कर दी थी। कई पुलिस वाले जख्मी हुए। इस बड़ी घटना से एक सामान्य सब्जी विक्रेता का कोई सरोकार नहीं था। इसके बावजूद उसके कब्जे से 24 किलो गांजा की बरामदगी दर्शाते हुए तराजू न देने की घटना का प्रतिशोध लिया गया। मामले के छह कुल आरोपितों में से आवेदक बेकसूर है। इसलिए उसे जमानत दी जानी चाहिए। अधिवक्ता संदीप जैन के तर्कों से सहमत होकर उच्च न्यायालय ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली। सुनवाई के दौरान कई पूर्व आदेश भी रेखांकित किये गए। कोर्ट सहमत हुआ और राहत दी। कोर्ट ने पुलिस पर तल्ख टिप्पणी भी की।

सेवा देने की शर्त पर मंजूर की अग्रिम जमानत अर्जी : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शिक्षा स्वयं सेवक के रूप में सेवा देने की शर्त पर अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। मामला दहेज प्रताड़ना से संबंधित है। इसी मामले में सह आरोपित बनाए गए आवेदक ने हाई कोर्ट में आवेदन दायर की अग्रिम जमानत चाही थी। न्यायमूर्ति शील नागू की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान आवेदक कटनी निवासी भरत छाबड़ा की ओर से अधिवक्ता योगेश सोनी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि कटनी की कोतवाली थाना पुलिस ने दहेज प्रताड़ना मामले में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ आवेदक को भी आरोपित बना लिया है। जबकि आवेदक एक सेवाभावी युवा है। उसके शहर छोड़कर बाहर जाने की संभावना नहीं है, अत: अग्रिम जमानत दी जा सकती है। यदि बड़े भाई की तरह गिरफ्तारी हुई तो उसकी छवि को गहरा आघात लगेगा।

हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद अपने आदेश में साफ किया कि आवेदक ने एक शिक्षा स्वयंसेवक के रूप में अपने निवास के निकट की सरकारी प्राथमिक शाला में स्वच्छत व आरोग्य को सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक व वित्तीय सहायता प्रदान करने व अपने कौशल व संसाधनों से उक्त विद्यालय में अवसंचरनात्मक सुविधाओं की कमी को दूर करने की स्वेछया सहमति प्रदान की है। वह एक विशिष्ठ प्राथमिक स्कूल का चयन करने के बाद इसके बारे में ग्राम पंचायत के कार्यालय को सूचित करेगा। लीगल एड इस आदेश के बारे में कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराएगा। इसी के साथ मामला निराकृत कर दिया।

Posted By: Sunil Dahiya
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