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विश्व विटिलिगो डे आज : संक्रामक बीमारी नहीं है सफेद दाग

Updated: | Fri, 25 Jun 2021 09:46 AM (IST)

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। विटिलिगो एक प्रकार का त्वचा विकार है जिसे सामान्य तौर पर ल्यूकोडर्मा के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जिससे व्यक्ति को शारीरिक रूप से तो किसी तरह की पीड़ा नहीं होती, लेकिन समाज में उस व्यक्ति को मानसिक रूप से काफी कुछ सहन करना होगा। यह बीमारी उसे दूसरों से अलग कर देती हैं। सफेद दाग को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां है। इन भ्रांतियों को दूर कर लोगों को इसके प्रति जागरुक करने के उद्देश्य से ही 25 जून को विश्व विटिलिगो डे मनाया जाता है। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की त्वचा पर सफेद धब्बे दिखाई देते हैं। यह माना जाता है कि यह बीमारी तब होती है जब रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से हमला करती है और अपने शरीर के भीतर रंग बनाने वाली कुछ कोशिकाओं, जिन्हें मिलेनोसाइट कहा जाता है को नष्ट कर देती हैं। हालांकि अनुवांशिक व पर्यावरणीय कारणों को भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार माना गया है।

न छुआछूत न कुष्ठ है सफेद दाग : त्वचा रोग विशेषज्ञ संघ के मध्यप्रदेश शाखा के सचिव डॉ.राजीव सक्सेना ने बताया कि जब व्यक्ति के शरीर में रंग बनाने वाले सेल विपरीत अवस्था में कार्य करने लगते है तो त्वचा पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं, लेकिन वर्षों पहले इसे श्वेत कुष्ठ माना जाता था। लोगों ने इसे कुष्ठ मान कर मरीजों से दूरी बनाना शुरू कर दिया। जबकि यह गलत है। सफेद दाग छुआछूत की बीमारी नहीं है और न ही ये किसी तरह का कुष्ठ है। अगर मरीज जल्दी अस्पताल पहुंचता है तो उसका उपचार संभव है। इसे एक तरह की अनुवांशिक बीमारी भी कहा जा सकता है। शहर में इससे पीड़ित लोग एक से तीन प्रतिशत है। हर उम्र के लोगों में यह हो सकता है। लेकिन विटिलिगो के आधे से ज्यादा मामलों में यह 20 साल की उम्र से पहले ही विकसित हो जाता है। वहीं 95 प्रतिशत मामलों में 40 वर्ष की आयु से पहले ही विकसित हो जाता है। विटिलिगो व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित नहीं करता है और यह रोग किसी भी तरह से संक्रामक नहीं है। लोगों में खानपान को लेकर भी भ्रांतियां है। लेकिन यह सही नहीं है। लोगों का मानना है कि मछली और दूध का एक साथ सेवन करने से ऐसा होता है। ये मिथ्या है।

विटिलिगो के लक्षण :

- त्वचा पर सफेग धब्बे ज्यादातर पैर, हाथ, होंठ, नाभि, आर्मपिट(बगल), कमर व जननांगों पर है।

- सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।

विटिलिगो ल्यूकोडर्मा का निदान :

स्किन बायोप्सी- प्रभावित क्षेत्र के छोटे टुकड़े को लिया जाता है व सूक्ष्मदर्शी से उसकी जांच की जाती है।

विटिलिगो का उपचार :

- कार्टिकोस्टेराइड क्रीम जो कि इन्फ्लेमेशन को नियंत्रित करती है।

- प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाली क्रीम जैसे टैक्रोलिमस एवं पिमक्रोलिमस विशेष रूप से चेहरे और गर्दन के दागों के लिए प्रभावी मानी जाती है। इसके अलावा फोटो थेरेपी, सोरोलिन, रोग प्रतिरोधक क्षमता को दबाने वाली दवाएं व शल्य क्रिया द्वारा इस बीमारी का सफल इलाज संभव है।

-उपचार के विकल्प से पर निर्णय लेने से पहले त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित होगा।

Posted By: Brajesh Shukla
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