ओमिक्रॉन के कारण मप्र के झाबुआ जिले में अलर्ट : गुजरात व राजस्थान बॉर्डर पार करना है तो जांच जरूरी

Updated: | Tue, 07 Dec 2021 07:31 AM (IST)

झाबुआ (नईदुनिया प्रतिनिधि)। पड़ोसी राज्योंं में ओमिक्रॉन के मामले सामने आने के बाद अब सीमावर्ती जिलों में अलर्ट जारी हो गया है। झाबुआ जिले की सीमाएं गुजरात व राजस्थान से सीधी जुड़ी ही हैं। इसके साथ आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक रिश्ते भी अत्यंत नजदीक के हैं। ऐसे में अब बॉर्डर पर यहां भी पुख्ता व्यवस्था करने का कार्य चल पड़ा है। बॉर्डर पार करने के लिए जांच को आवश्यक किया जा रहा है। राज्य सरकार मान रही है कि संकट के दरवाजे पर ही प्रदेश खड़ा है क्योंकि पड़ोसी राज्यों में संकट की दस्तक हो गई है।

कोरोना का नया वैरियंट अपना दायरा सतत बढ़ाता जा रहा है। प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया जा चुका है क्योंकि पड़ोसी राज्यों में संक्रमण आ चुका है।खतरा यह है कि अब पड़ौसी राज्योंं से वह प्रदेश में कही प्रवेश ना कर ले।

राजस्थान के रास्ते आया था

वैसे झाबुआ में कोरोना का पहला मामला 6 मई 2020 को राजस्थान के रास्ते ही आया था। पेटलावद क्षेत्र की एक महिला राजस्थान के मजदूरी स्थल से विशेष बस के माध्यम से लौट रही थी। गुजरात के दाहोद शहर का एक संक्रमित परिवार मजदूरों को ला रहे उस वाहन में सवार हो गया। उनसे जिले की मजदूर महिला संक्रमण की चपेट में आ गई।

गुजरात से यह जुड़ाव

-23 किमी हाईवे पर झाबुआ से गुजरात

-07 अलग-अलग रास्ते गुजरात जाने के

-14 वैध यात्री बसे संचालित हो रही

-50 के लगभग अवैध वाहन

-4 लाख से अधिक ग्रामीण पलायन पर

राजस्थान से यह नजदीकी

-45 किमी दूर झाबुआ से मुख्य बॉर्डर

-03 ग्रामीण रास्ते

-06 वैध बसें

-20 के लगभग अवैध वाहन

-2 लाख से अधिक ग्रामीण पलायन पर

यह है खतरा

-निकट के संबंध होने से आवागमन तेज

-बॉर्डर पर कोई रोक-टोक नही

-अवैध शराब व अन्य सामग्री की तस्करी जोरो पर

-ज्यादा समय यातायात रोकना मुश्किल

-मेघनगर,बामनिया आदि रेलवे स्टेशनो से आवाजाही

यह है चुनौती

-शादियो में संक्रमण को फैलने से रोकना

-मेडिकल सुविधा के लिए दाहोद पर निर्भरता

-व्यापार एक-दूसरे के बगैर अधूरा

-श्रमिको की पहचान करना मुश्किल

-रेल सेवाओ पर नजर रखना

यह है राज्य सरकार के निर्देश

-तीन टी यानी टेस्टिंग, ट्रेसिंग व ट्रीटमेंट पर ध्यान हो

-पड़ोसी राज्यों से आने वालों की जांच हो

-बॉर्डर पर निगरानी रखी जाए

-रेलवे स्टेशनों पर नजर रखें

लापरवाही जगह-जगह

मास्क का उपयोग तो चुनिंदा लोग ही करते दिखते हैं। शारीरिक दूरी नियम भुला दिया गया है।लंबे समय तक कोरोना का दर्द जिले ने झेला किंतु कोरोना गाइड लाइन का अब कोई पालन नही कर रहा। सावधानी हटते ही महामारी को सर उठाने का अवसर मिल जाता है। अभी संपूर्ण परिदृश्य लापरवाही से भरा हुआ है।

यह है कमजोरी

कहने को ऑक्सीजन प्लांट है। पलंगों का विस्तार हो चुका है लेकिन मैदानी सच यह है कि अधिक से अधिक 500 सक्रिय मरीज होने तक ही जिला स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवा सकता है। इससे आगे आंकड़ा बढ़ने पर जिले में दूसरी लहर का इतिहास दोहराया जा सकता है, जब कई मरीजों को उपचार ही नहीं मिल पाया।

व्यवस्था कर रहे हैं

कलेक्टर सोमेश मिश्रा का कहना है कि टेस्टिंग बंद ही नही की गई है। गुजरात व राजस्थान बॉर्डर पर जांच की व्यवस्था कर रहे है। इसके अलावा आने-जाने वालों पर भी निगरानी रखवाई जाएगी। अन्य तमाम व्यवस्था की भी लगातार समीक्षा हो रही है।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay