ओंकार पर्वत पर निवासरत परिवारों को जमीन और ढाई लाख रुपये मिलेंगे

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास को आवंटित हुई 22.10 हेक्टेयर भूमि। ओंकार पर्वत की आस्था व पर्यावरण नहीं होगा प्रभावित।

Updated: | Fri, 27 May 2022 09:39 AM (IST)

- हरियाली अमावस्या से मांधाता पर्वत पर 36 हेक्टेयर में होगी पौधरोपण की शुरूआत

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास और संस्कृति विभाग द्वारा ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर की 108 फीट की बहुधातु प्रतिमा, संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान की स्थापना की जा रही है। प्रतिमा तथा संग्रहालय के लिए मांधाता पर्वत पर लगभग 11.50 हेक्टेयर भूमि और वेदांत संस्थान के लिए गोदड़पुरा पर्वत पर लगभग 22.10 हेक्टेयर भूमि संस्कृति विभाग को आवंटित की गई है। इस प्रकल्प के लिए पर्वत पर निवासरस जिन लोगों को बेदखल किया गया है उन्हें मकान बनाने के लिए अन्य स्थान पर शासन जमीन और संस्कृति विभाग द्वारा ढाई लाख रुपये की राशि दी जाएगी। शासन ने यह कदम पर्वत पर हो रही तोड़फोड़, पेड़ों की कटाई और अतिक्रमण हटाने के विरोध में हो रहे आंदोलन को देखते हुए उठाया है। विदित हो कि ओंकारेश्वर में इसके विरोध में करीब 25 दिनों से आंदोलन व धरना चल रहा है।

आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रभारी अधिकारी डा. शैलेंद्र मिश्रा ने बताया कि मांधाता पर्वत पर आवंटित परिसर में अस्थाई रूप से निवासरत लगभग 30 परिवारों को नगर परिषद द्वारा पुर्नवास के लिए आवास निर्माण के लिए भूमि चिन्हांकित की गई है। पर्वत से छह मंदिरों की मूर्तियों राजराजेश्वरी मंदिर में स्थापित की जाएगी। इनमें शिव मंदिर, सांई मंदिर, शनि मंदिर, राम मंदिर, नर्मदा मंदिर तथा निखिल आश्रम में स्थापित मूर्तियां शामिल है। इन मंदिर के पुजारियों को अन्यत्र स्थान पर अस्थाई कुटिया उपलब्ध कराई जाएगी।

28 जून को हरियाली अमावस्या से मांधाता पर्वत पर करीब 36 हेक्टेयर में सघन पौधरोपण होगा। नीम, पीपल, वटवृक्ष, गुलमोहर, बेलपत्र, पलाश, करंज तथा कचनार आदि पौधे लगाए जाएंगे। डेढ़ वर्ष तक इन पौधों का प्रबंधन, पोषण व रखरखाव किया जाएगा। इससे मांधाता पर्वत हराभरा और परिवेशपूर्ण रूप से प्राकृतिक और आध्यात्मिक रहेगा।

पर्वत पर नहीं होगी ब्लास्टिंग

मांधाता पर्वत पर संग्रहालय निर्माण के लिए अभी तक न तो कोई ब्लास्टिंग की गई है और न ही की जाएगी। साथ ही होटल, स्वीमिंग पूल और माल जैसी किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होगी। इससे स्पष्ट है कि यहां भौतिक सुविधाओं का विस्तार नहीं किया जाएगा।

प्राचीन आश्रम का नहीं हो रहा है विस्थापन

न्यास के प्रभारी अधिकारी डा. मिश्रा ने बताया कि किसी भी प्राचीन आश्रम और जनजातीय समाज का विस्थापन नहीं किया जा रहा है। प्राचीन पैदल परिक्रमा पथ यथावत रहेगा। इसका सौंदर्यीकरण किया जाएगा। परिक्रमावासियों के लिए सुविधाएं जुटाई जाएगी। परिक्रमा मार्ग में संचालित दुकानें, संग्रहालय परिसर से बाहर होने के कारण इन्हें मांधाता पर्वत से हटाने की कोई योजना नहीं है।

निर्माण में होगा देशज सामग्री का उपयोग

इन सभी कार्यों में भारतीय वास्तु एवं स्थापत्य को ध्यान में रखते हुए देशज सामग्री पत्थर, काष्ठ, मिट्टी, ईंट आदि का अधिकतम उपयोग करते हुए पर्यावरण अनुकूल निर्मित की जाएगी। पर्वत को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए सीएनजी व इलेक्ट्रानिक वाहनों को ही प्रवेश मिलेगा। प्रकल्प में विभिन्ना स्थानों पर तीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाएंगे। सौर व अन्य वैकल्पिक ऊर्जा तथा जैविक सामग्रियों का उपयोग करते हुए यह परियोजना शून्य अपशिष्ट आधारित होगी। इस परियोजना से रोजगार सृजन के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network
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