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Mandhata By-Elections: मांधाता के लिए ऐतिहासिक साबित होगा उप चुनाव

Updated: | Thu, 29 Oct 2020 11:55 AM (IST)

खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि), Mandhata By-Elections। मध्य प्रदेश में हो रहा उपचुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में पहली बार एक साथ 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है। इनमें अधिकांश सीटों पर पद से त्यागपत्र देने वाले ही अपनी पूर्व की प्रतिद्वंद्वी पार्टी के झंडे तले फिर से किस्मत आजमा रहे हैं। इस चुनाव से प्रत्याशी ही नहीं प्रदेश की सरकार का भविष्य भी तय होना है। इसलिए भाजपा और कांग्रेस प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। इसके चलते जिले की मांधाता विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की औसतन नौ दिन के अंतरात में आमसभाएं हो रही हैं। वे गुरुवार को ग्राम सुलगांव में आमसभा को संबोधित करेंगे। 37 दिन में उनका मांधाता क्षेत्र का यह चौथा दौरा है जबकि कांग्रेस प्रत्याशी बड़े नेताओं की सभा और शक्ति प्रदर्शन के बगैर अपने ही बलबूते पर गांव-गांव प्रचार में जुटे हैं। दोनों दलों के चुनाव प्रचार का तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

जिले की इकलौती सामान्य मांधाता विधानसभा सीट पर कांग्रेस के उत्तमपालसिंह पुरनी और भाजपा से नारायण पटेल चुनाव मैदान में हैं। दोनों ही दल जीत के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा की ओर से पूरी पार्टी और संगठन सक्रिय है। वहीं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान स्वयं कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। मांधाता क्षेत्र में अब तक तीन आमसभाएं वे ले चुके हैं। इनमें भाजपा प्रत्याशी की घोषणा होते ही उन्होंने 23 सितंबर को पुनासा में पहली सभा ली थी। इसके बाद आठ अक्टूबर को पुनासा, 27 अक्टूबर को किल्लौद में सभा के बाद 29 अक्टूबर को सुलगांव में आमसभा हो रही है। इस प्रकार 36 दिन में उनकी चार आमसभाएं हो रही हैं, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यहां मुख्यमंत्री के अलावा भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री नरेंद्रसिंह तोमर सहित अन्य दिग्गज भी मांधाता क्षेत्र में सभाएं कर चुके हैं।

मतदाता के घर पहुंचने का लक्ष्य

चुनावी घमासान में कांग्रेस के उत्तमपालसिंह पुरनी पहली बार मैदान में हैं। वैसे उनके पिता इस क्षेत्र का विधायक के रूप में तीन बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका अनुभव और लोगों में गहरी पैठ की वजह से उपचुनाव में मतदाताओं को साधने की चुनावी रणनीति भाजपा से एकदम अलग नजर आ रही है। यहां बगैर किसी शक्ति प्रदर्शन या बड़ी सभाओं के पिता-पुत्र जुटे हुए हैं। कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ, आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण यादव, पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, विजयलक्ष्मी साधो सहित अन्य नेता मोर्चा संभाल चुके हैं। कांग्रेस का कहना है कि हमारा प्रयास मतदाता तक पहुंचकर उसकी समस्या जानकर अपनी बात रख रखना है। इसमें सभी का सहयोग मिल रहा है।

गले नहीं उतर रहा प्रत्याशियों के खर्च का ब्यौरा

मांधाता चुनाव में हुए खर्च का प्रत्याशियों को तीन बार ब्यौरा निर्वाचन आयोग को देना है। इसमें दो बार व्यय का ब्यौरा प्रत्याशी के अभिकर्ता दे चुके हैं। इसमें कांग्रेस और भाजपा द्वारा लगभग बराबर खर्च बताया गया है। दूसरी बैठक में 27 अक्टूबर को कांग्रेस प्रत्याशी उत्तमपाल ने 10 लाख 73 हजार 449 रुपये तथा भाजपा प्रत्याशी की ओर से 10 लाख 18 हजार 638 का खर्च दशार्या गया है। चुनाव प्रचार में भाजपा की लगातार स्टार प्रचारकों का दौरा और सभाओं के बावजूद दोनों का खर्च लगभग बराबर होना लोगों के गले नहीं उतर रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network
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