खंडवा। खेल जगत में खंडवा का स्वर्णिम इतिहास रहा है। वर्तमान में भी यहां के खिलाड़ी प्रदेश ही नहीं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम लहरा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बाद भी उत्कृष्ट खेल प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में यह उपलब्धि बढ़ती जा रही है। कुश्ती, शतरंज, भारोत्तोलन, क्रिकेट समेत अन्य खेलों में अब खिलाड़ी अधिक संख्या में तैयार हो रहे हैं। इन्हें बेहतर संसाधन व आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षण की आवश्यकता है। नईदुनिया द्वारा चलाया जा रहा अभियान 'खंडवा का मन' बहुत ही सार्थक है। जनप्रतिनिधि, शासकीय अमला इस पर ध्यान दें व अमल करें तो यह और अधिक सार्थक हो जाएगा।
खंडवा परंपरागत खेलों के मामले में समृद्ध शहर रहा है। यहां हाकी के अंतरराष्ट्रीय मैच हो चुके हैं। इसमें भारत के अलावा इंग्लैंड और नीदरलैड्स की टीम खेल चुकी है। अगर फुटबाल की बात करे तो यहां कई बड़े और यादगार आयोजन हो चुके हैं। कुश्ती में खंडवा ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। जिमखाना क्रिकेट क्लब द्वारा राष्ट्रीय स्तर की कई क्रिकेट प्रतियोगिताएं आयोजित कर चुका है। अजीत वाडेकर, चेतन चौहान जैसे खिलाड़ी यहां आ चुके हैं। आज भी जिमखाना अपने प्रयासों से लगातार नई पीढ़ी को खेलों से जोड़कर रखने के लिए निरंतर प्रयासरत् है। इसके साथ ही मलखंभ, ताइक्वांडो, कराते, शतरंज में भी खंडवा अग्रणी है।
यहां योग्य कोचों के माध्यम से अच्छे खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। हमारे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बहुत ही प्रतिभाशाली युवा हैं। जिन्हें दिशा देने की आवश्यकता है। आदिवासी इलाकों में चलने वाले गुलेल इसकी एक पहचान है। अब जरूरत है सर्वसुविधायुक्त स्टेडियम बनाकर शहर में बड़े खेल आयोजन करवाकर हम यहां की युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करें। ताकि खंडवा का नाम गौरवान्वित हो सके। इसी प्रकार बंद हुए अखिल भारतीय फुटबाल और हाकी स्पर्धा की शुरुआत भी होनी चाहिए। जब राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच होते हैं तो खंडवा के लोग बहुत खुशी के साथ उन बच्चों को देखते हैं आनंद लेते हैं। तो क्या हमारे खंडवावासी शामिल नहीं हो सकते। उचित मार्गदर्शन के सब कुछ संभव है। खेल विभाग की सक्रियता और बढ़ाई जानी चाहिए। बच्चों को खेलो में आगे बढ़ाने के लिए खंडवा छोड़ना पड़ता है। क्या खेल सिर्फ महानगर तक ही सीमित है। छोटे जिलों में भी खेल सुविधाएं बढ़नी चाहिए। खेल संगठनों को भी शासन से पर्याप्त मात्रा में आर्थिक योगदान मिलना चाहिए। तभी खेल और खिलाड़ी आगे बढ़ सकेंगे। यह काम बिना सरकारी मदद से आगे नहीं बढ़ सकेगा।
मन की याद गली
मेरा जन्म 12 दिसंबर 1963 को खंडवा में ही हुआ। मैंने हिंदी स्कूल व जनता स्कूल से पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही क्रिकेट से लगाव रहा है। क्रिकेट के इसी लगाव को आज भी कायम रखकर बच्चों को प्रशिक्षण व बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए पूरी टीम के साथ मार्गदर्शन दे रहा हूं।