रेलवे की लापरवाही को यात्रियों के माथे मढ़ने की जुगत में जुटे रहे अफसर

Updated: | Sat, 27 Nov 2021 06:28 PM (IST)

- ऊधमपुर एक्सप्रेस अग्निकांड : लखनऊ से सीआरएस, झांसी रेल मण्डल डीआरएम, आरपीएफ के डीआइजी सहित 50 से ज्यादा सदस्यों का जांच दल आया।

- हेतमपुर स्टेशन पर पहुंचे डीआरएम व अन्य अफसर इस हादसे को बीड़ी सिगरेट से बताने लगे, लखनऊ से सीआरएस भी विशेष टीम लेकर जांच को पहुंचे।

हरिओम गाैड, मुरैना नईदुनिया। ऊधमपुर-दुर्ग सुपरफास्ट ट्रेन के दो एसी कोच में आग लगने की घटना ने रेलवे में हड़कंप मचा दिया है। हादसे के कारणों की जांच करने आधी रात को झांसी मण्डल के डीआरएम और शनिवार को तड़के लखनऊ से चीफ ऑफ रेलवे सिक्योरिटी (सीआरएस) भी अपनी टीम लेकर पहुंच गए। यह उच्च स्तरीय जांच दल, डिब्बों में लगी आग का दोष यात्रियों के माथे मढ़ने की प्लानिंग करते हुए नजर आए। जबकियह हादसा डिब्बे के अंदर बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट से हुआ है, जिसे कोई और नहीं बल्कि आग से जले डिब्बे में बैठे रेलवे के टिकट कलेक्टर (टीसी) ही बता चुके हैं।

गौरतलब है किजम्मू के ऊधमपुर से छत्तीसगढ़ के दुर्ग जाने वाली ऊधमपुर - दुर्ग सुपर फास्ट एक्सप्रेस की दो एसी डिब्बो (ए-1 और ए-2) में शुक्रवार की दोपहर आग लग गई थी। इन दोनों डिब्बों में 77 यात्री थे, जिनमें से कई यात्री डिब्बों के कांच फोड़कर बाहर निकाले गए। भगदड़ व चीखपुकार में कई यात्री घायल हो गए। इस हादसे के कारण ग्वालियर-आगरा ट्रैक तीन घंटे तक जाम रहा। ट्रेन के डिब्बांे में आग लगने के कारणों की जांच करने उच्चतरीय दल मुरैना के हेतमपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचा, जहां आग से जलकर बर्बाद हुए दोनों डिब्बे रखे हुए हैं। इस उच्च स्तरीय दल में लखनऊ जोन के सीआरएस मो. लतीफ खान, झांसी रेल मण्डल के डीआरएम आशुतोष कुमार, आरपीएफ के डीआइजी आरएसपी ®सह के अलावा अन्य अधिकारी-कर्मचारी पहुंचे। उच्च स्तरीय यह दल डिब्बों मंे आग लगने के कारणों को किसी यात्री द्वारा फेंकी गई सिगरेट-बीड़ी के कारण बताते रहे। इसी बीच आरपीएफ व झांसी मण्डल के कुछ अफसरों ने हादसे को शॉर्टसर्किट से बताया तो लखनऊ के अफसरों ने उन अफसरांे को चुप रहने की नसीहद दे डाली। जांच के नाम पर पूरे मामले की दिशा बदलने में उच्च स्तरीय दल इतनी शिद्दत से लगा रहा किसीआरएस व डीआरएम ने चंद मिनट तक जले हुए डिब्बों को देखा, उसके बाद साढ़े 6 घंटे से ज्यादा समय तक स्पेशल ट्रेन के डिब्बे के अंदर बैठकर आला अफसरों की जांच पड़ताल चली और दोपहर साढ़े 12 बजे झांसी के लिए रवाना हो गए। उधर आरपीएफ व झांसी मण्डल के अफसरों ने बताया किघटना के बाद दो टीसी व 22 यात्रियांे के बयान दर्ज हुए हैं, जिन्होंने ट्रेन एसी डिबबे ए-1 के टॉयलेट में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात बताई है। इतना ही नहीं हादसे के बाद दर्ज हुई सूचना में आगजनी की घटना शॉर्टसर्किट व आग बुझाने के सिलिंडरों में गैस नहीं होने को बताया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी, किउच्च स्तरीय दल इस घटना का दोष यात्रियों की लापरवाही (बीड़ी-सिगरेट) को देता है या फिर कुछ और।

खाली सिलिंडरों की पूछा तो डिब्बे में घुस गए डीआरएम, फिर नहीं निकले

ऊधमपुर ट्रेन में आगजनी की घटना की जांच करने आए डीआरएम आशुतोष कुमार से नईदुनिया संवाददाता ने जब पूछा कि ट्रेन के डिब्बो में रखे आग बुझाने वाले सिलिंडर खाली क्यों थे, यह लापरवाही किसकी है और संबंधित पर क्या कार्रवाई हो रही है। यह सवाल सुनते ही डीआरएम आशुतोष चुप हो गए। एक शब्द बोले बिना वह स्पेशल ट्रेन के डिब्बे में घुस गए और दरवाजा बंद कर बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात करवा दिया। इसके बाद न डीआरएम बाहर निकले न ही सीआरएस मो. लतीफ खान।

एफएसएल ने लिए सैंपल, पहुंचा बम डिस्पोजल स्क्वाड भी

ट्रेन के डिब्बों में लगी आग के कारणों की जांच में शुक्रवार से ही मुरैना एफएसएल की डीएसपी अर्पिता सक्सेना जुटी हुई हैं। शनिवार की सुबह डीएसपी अर्पिता सक्सेना से भी रेलवे सीआरएस व डीआरएम ने गुप्त चर्चा की। बताया गया है, किएफएसएल अफसरों ने भी आग की घटना शॉर्टसर्किट से होने की प्रबल संभावना जताई है। एफएसएल की टीम ने जले जुए डिब्बों के जले व अधजले तारों के अलावा आधा दर्जन से ज्यादा पेनल व रिले भी सैंपल के लिए इकट्ठा किए हैं। इनकी जांच एफएसएल लैब में कराई जाएगी। इसके अलावा बम डिस्पोजल स्क्वाड भी जले हुए डिब्बों में जांच करने पहुंचे। बम डिस्पोजल स्क्वाड टीम ने डिब्बों में विस्फोटक सामग्री की छानबीन की, लेकिन डिब्बों में ऐसा कुछ भी नहीं मिला। इसके अलावा दिल्ली रेल मंत्रालय के कुछ वरिष्ठ अफसरों ने मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिए जले हुए ट्रेन के डिब्बों का अवलोकन किया है।

Posted By: vikash.pandey