मुरैना जिले के जिस गांव में बनी जहरीली शराब से गई थी 28 लोगों की जान, वहां बुजुर्गों की पंचायत ने कर दी शराबबंदी

बुजुर्गों की पंचायत ने शराब बेचने वालों को गांव से बाहर किया तो कोई दूसरा साहस नहीं कर पाया।

Updated: | Fri, 21 Jan 2022 08:41 PM (IST)

हरिओम गौड़, मुरैना। भिंड में जहरीली शराब से चार लोगों की मौत ने चंबल अंचल में खतरनाक केमिकलों से बनने वाली नकली शराब के अवैध कारोबार पर फिर बहस छेड़ दी हैै। एक साल पहले मुरैना में भी जहरीली शराब 28 लोगों की जान ले चुकी है। इस घटना के बाद शासन प्रशासन ने अवैध शराब बनाने-बेचने पर अंकुश लगाने के कदम उठाने की बात तो की पर ये खोखली ही साबित हुई, ऐसे में मुरैना के बागचीवनी थाना क्षेत्र का मानपुर-पृथ्वी गांव मिसाल बनकर उभरा है। यह वही गांव है जहां जहरीली शराब बनाई गई थी।

घटना से सबक लेते हुए गांव के बुजुर्गों ने पंचायत बुलाकर शराब बंदी का एलान किया। शराब बनाने या बेचने पर जुर्माना और गांव से बहिष्कृत करने का कड़ा फैसला लिया, इस फैसले ने ऐसा असर दिखाया कि गांव में शराब बनाने-बेचने का कोई साहस नहीं कर सका, यहां तक कि गांव के 90 प्रतिशत लोगों ने शराब से तौबा भी कर ली।

सरकार रोकती तो चारों ओर नहीं होता अवैध कारोबार: चंबल में नकली शराब बनाने और बेचने का कारोबार बिना पुलिस की मिलीभगत के संभव नहीं है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक ये जानते हैं। यही कारण है कि उन्होंने भिंड में चार मौत की घटना पर आला अधिकारियों से ही सीधे नाराजगी जताई ।

मौतों की घटना के बाद ही इस अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस एक्शन में आती है। कुछ दिन बीतने के बाद कारोबार फिर रफ्तार पक़ड लेता है। मुरैना में 28 मौतों के बाद आबकारी अधिकारी, एसडीओपी व संंबंधित थाना तक सस्पेंड किया गया। कलेक्टर-एसपी बदले गए, लेकिन इसके बाद भी मानपुर पृथ्वी गांव के पास के आसपास तक के गांवों में ओपी (ओवर प्रूफ) केमिकल से जमकर शराब बन रही है।

शराबमुक्त गांव हमारे बुजुर्गों की ही देन

वरिष्ठ समाजसेवी लखन सिंह पटेल ने बताया कि गांव के ही 12 लोग मरे थे। उस मंजर के बाद ही पंचायत में कड़े नियम बनाए गए। गांव के एक युवक ने चोरी-छिपे शराब बेची, इसका पता लगा तो पंचायत ने उसे गांव से बाहर निकाल दिया। मानपुर पृथ्वी गांव के पूर्व सरपंच मुरारीलाल यादव का कहना है कि जहरीली शराब की घटना पूरे गांव के नाम पर कालिख पोत दी थी। पूरा काम पुलिस के संरक्षण में चल रहा था, इसीलिए पुलिस पर तो भरोसा ही नहीं रहा। बुजुर्गों ने पहल की और पंचायत के फैसले के बाद गांव में शराब बनना तो दूर कोई बेच भी नहीं सकता।

इनका कहना है

नशा एक सामाजिक बुराई है। प्रशासन के साथ आमजन भी इस तरह काम करे तो ऐसे अच्छे परिणाम हर जगह आ सकते हैं। बागचीनी व जौरा क्षेत्र में जहां-जहां अवैध व नकली शराब की शिकायत ग्रामीण बता रह हैं वहां लगातार हम कार्रवाई कर रहे हैं। नवंबर में ओपी केमिकल लाने वालों पर सख्त कार्रवाई की है।

ललित शाक्यवार, प्रभारी डीआइजी, चंबल रेंज

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay