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International Womens Day Special: मुरैना में पहले शराब का कलंक धोया, फिर दूध क्रांति से गांव में ले आईं खुशहाली

Updated: | Sun, 07 Mar 2021 08:32 PM (IST)

International Women's Day Special: हरिओम गौड़, मुरैना। जहरीली शराब कांड और 28 लोगों की मौत के कारण बदनामी का दंश झेल रहे मुरैना जिले में एक गांव उमरियापुरा भी है, जहां की महिलाओं ने न केवल पूरे गांव को शराबमुक्त कर दिया, बल्कि अब शराब की जगह गांव में दूध क्रांति ले आईं। जिस गांव में कभी दर्जनों पेटी शराब रोज खपती थी, वहां से सैकड़ों लीटर दूध की सप्लाई मुरैना व अंबाह में हो रही है। इन महिलाआंे के प्रयास व परिणामों की प्रशंसा वर्ष 2015 में पूर्व राष्ट्रपति स्व. प्रणव मुखर्जी तक ने की थी।

जिला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर अंबाह तहसील के उमरिया पुरा गांव में 14 साल पहले तक हर छोटी-बड़ी दुकान से लेकर हाथ ठेलों पर अवैध शराब बिकती थी। शराब के कारण कई लोगों की असमय मौत हो गई। घरों में विवाद बढ़ने लगे और नशे के कारण कर्ज में महिलाओं के जेवर तक बिकने लग गए।

इस बदहाली को देखकर साल 2007 में राजोबाई कुशवाह ने नारायणी, सीता ओमवती, कमलेश, रामभूली, रजश्री, गुड़िया, लक्ष्मी, मिथलेश, ममता, रामरथी सहित 22 महिलाओं का समूह बनाया। इस टोली ने शराब पीने वाले पुरुषों को समझाया। बात नहीं बनती तो महिलाएं ही अपने पति या बेटे को पुलिस को सौंप देतीं।

उन्होंने गांव में शराब सप्लाई करने वाले तस्करों के खिलाफ लाठी उठा ली। जहां शराब बिकती, उस दुकान में तोड़फोड़ कर देतीं। महिलाओं ने तस्करों की गाड़ियों को पकड़कर पुलिस के हवाले करना शुरू किया। यह क्रम कई माह चला तो गांव में शराब बिकना बंद हो गई, पीने वाले भी कम होते गए। इसके बाद महिलाओं ने भैंस पालन कर दूध बेचने का काम शुरू हुआ। 54 परिवार वाले इस गांव की आबादी लगभग 950 लोगों की है जबकि 325 से ज्यादा भैंस व 60 गाय हैं। गांव में हर रोज 550 से 600 लीटर दूध का उत्पादन होता है।

पहले अवैध शराब बेचता था अब दूध

उमरियापुरा गांव निवासी कंडेल कुशवाह ने बताया कि वह करीब 25 साल से शराब पी रहे थे लेकिन महिलाओं के आंदोलन ने उनकी शराब छुड़ा दी। 11 साल से शराब को हाथ नहीं लगाया। गांव के रामरज कुशवाह अवैध शराब बेचने का काम भी करते थे। महिलाओं के विरोध के बाद दुकान बंद हुई और खुद के घर में चार भैंस बांधी। शराब बेचने वाले रामरज अब हर रोज 30 लीटर से ज्यादा दूध बेचकर माह 25 से 28 हजार रुपये कमा रहे हैं।

इनका कहना

शराब के कारण कई लोगों की असमय मौत हो गई। घर-घर में विवाद हो रहे थे। शराब के लिए लोग घर का सामान चुराकर ले जाते। यह देखा नहीं जाता, इसलिए महिलाओं को साथ जोड़ा और गांव की सड़क से लेकर थाने तक गए। शराब माफिया का गांव में आना बंद कराया।

- राजो कुशवाह, शराबबंदी मुहिम की मुखिया

गांव में शराब बंद कराने के बाद महिलाओं ने ही तय किया कि वह घर के खर्च के लिए भैंस पालकर दूध बेचेंगी। आज हर घर के दरवाजे पर चार से छह भैंस बंधी हैं। दूध अब हर घर का मुख्य व्यवसाय है जिससे पूरा गांव पल रहा है। हमारे बच्चे अच्छा खाने, पहनने और पढ़ने लगे हैं।

- सीताबाई कुशवाह, रहवासी उमरियापुरा

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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