डकैतों से मुक्ति दिलाने वाला आश्रम अब चंबल के माथे से मिलावट के दाग को धोने में जुटा

Updated: | Fri, 22 Oct 2021 08:11 PM (IST)

हरिओम गौड़, मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना और भिंड जिलों में चंबल के बीहड़ कभी डाकुओं की शरणस्थली थे। आतंक का पर्याय बने डाकुओं का आत्मसमर्पण जौरा के गांधी सेवा आश्रम में करवाया गया था। अब यही आश्रम चंबल के माथे से मिलावट के दाग धोने में जुटा है। दरअसल चंबल की धरती अब मिलावटखोरी के लिए बदनाम है। यहां मिलावटी दूध, मावा, पनीर के अलावा सरसों के तेल तक में मिलावट के दाग लगते रहे हैं। इस दाग को मिटाने के लिए गांधी आश्रम फिर आगे आया है। मुरैना और भिंड जिलों में सरसों का उत्पादन खूब होता है।

तेल में मिलावट को लेकर मुरैना का नाम कई बार कलंकित हुआ है। यह देख जौरा तहसील के गांधी सेवा आश्रम ने किसानों से सरसों खरीदकर कच्ची घानी का शुद्ध सरसों तेल का उत्पादन शुरू किया। 2019 में यह काम मात्र एक टन सरसों से तेल उत्पादन के साथ शुरू हुआ था, जो मात्र दो साल में ही 40 गुना बढ़कर 40 टन पर पहुंच गया है।

आश्रम का कच्ची घानी सरसों तेल बाजार से महंगा है, क्योंकि आधुनिक स्पेलर (तेल निकालने वाली मशीनें) सरसों के दाने से 41 फीसद तक तेल निकालती है, लेकिन कोल्हू से सरसों दाने से मात्र 26 फीसद ही तेल निकल पाता है। महंगा होने के बाद भी यहां के सरसों तेल की मांग ज्यादा है। हर्बल कॉस्मेटिक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को गांधी सेवा आश्रम का शुद्ध सरसों तेल ऐसा रास आया, कि कई कंपनियां बड़ी खरीदार बन गईं हैं।

बापू की तस्वीर के सामने सरेंडर हुए थे 654 डकैत

प्रख्यात गांधीवादी विचारक डॉ. एसएन सुब्बाराव ने मुरैना जिले के जौरा में गांधी सेवा आश्रम की नींव रखी थी और 14 अप्रैल 1972 को इसी आश्रम में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण और उनकी पत्नी प्रभावती देवी की मौजूदगी में महात्मा गांधी की तस्वीर के सामने 654 डकैतों से आत्मसमर्पण करवाया गया था।

इनका कहना है

गांधी सेवा आश्रम में हम कोल्हू पद्धति से शुद्ध सरसों का तेल तैयार करते हैं। इसकी मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए उत्पादन दो साल में 40 गुना बढ़ा दिया है। हम किसानों से सरसों बाजार से महंगा खरीदते हैं। पुलिस विभाग के कर्मचारी, भोपाल से लेकर पुणे तक एवं कई हर्बल कॉस्मेटिक कंपनियां अपने उत्पाद के लिए जौरा आश्रम से सरसों तेल खरीद रही हैं।

- रणसिंह परमार, राष्ट्रीय अध्यक्ष, एकता परिषद

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay