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Panna Forest News: पन्ना टाइगर रिजर्व के कई गांवों में तेंदुए का आतंक, चार मवेशियों का शिकार

Updated: | Thu, 20 May 2021 06:15 PM (IST)

पन्ना, नईदुनिया प्रतिनिधि। पन्ना टाइगर रिजर्व के बफरजोन जंगल के आसपास स्थित आधा दर्जन ग्रामों में बीते दो दिनों से तेंदुए का आतंक कायम है। आबादी क्षेत्र के निकट तेंदुए की मौजूदगी के चलते ग्रामवासी भय और दहशत के माहौल में जी रहे हैं। बीते दो दिनों में तेंदुए ने घर के बाड़े में बंधे तीन बछड़ों व एक पड़िया को जहां मार दिया है, वहीं एक बछड़े को घसीट कर जंगल की तरफ ले गया है। तेंदुए के डर से मनौर व जरुआपुर गांव के लोग घरों में कैद हैं।

आबादी क्षेत्र में आकर तेंदुए ने बछड़ों का किया शिकार : पन्ना टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र व उत्तर वन मंडल के जंगल से लगे डेढ़ सैकड़ा से भी अधिक गांव हैं, जहां हिंसक वन्य प्राणियों का खतरा बना रहता है। इन ग्रामों में बाघ, तेंदुआ अक्सर ही मवेशियों को अपना शिकार बना लेते हैं पन्ना शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर जरुआ पुर गांव में गुरुवार 20 मई को तड़के तकरीबन 3 बजे के लगभग तेंदुआ जंगल से आकर शंकर बंगाली के घर में घुस गया घर के जिस हिस्से में मवेशी बंधे थे वहां से इस तेंदुए ने एक बछड़े को दबोच कर उसे जंगल की तरफ घसीट ले गया। घर के बाहर तेंदुए के पग मार्क बने हुए हैं। ग्रामीणों ने रास्ते में बने तेंदुआ के पग मार्क दिखाते हुए बताया कि बछड़े को यहीं से घसीटकर तेंदुआ ले गया है।

ग्राम मनोर मैं भी 4 पशुओं को बनाया शिकार : इस घटना के पूर्व पास के ही मनौर गांव में मंगलवार की रात तेंदुए ने दबिश दी थी। गांव के पशुपालक राजेंद्र सिंह यादव के बाड़े में जहां मवेशी बंधे रहते हैं, वहां तेंदुआ पहुंचा और तीन बछड़ों व एक पडि़या को बुरी तरह से जख्मी कर मार डाला। रात में बारिश होने तथा बिजली गुल रहने के कारण पशुपालक को तेंदुआ के आने की भनक नहीं लगी। सुबह जब राजेंद्र सिंह यादव पशुओं के बाड़े में गए, तो वहां का नजारा देख हैरान रह गए। लहूलुहान बछड़े मृत पड़े थे तथा तेंदुए के पंजे के निशान आसपास मौजूद थे। जिससे यह ज्ञात हुआ कि तेंदुए के हमले से इन बछड़ों व पडिया की मौत हुई है। श्री यादव ने बताया कि जिन बछड़ों व पडि़या की मौत हुई है, वे गाय व भैंस दूध देती थीं।

डर से काम पर जाने से कतरा रहे ग्रामीण : जंगल का राजकुमार कहे जाने वाले तेंदुआ के आबादी क्षेत्र में दस्तक देने से मनौर व जरुआपुर सहित आसपास के गांव बडौर, दरेरा व मडैयन में दहशत बनी हुई है। तेंदुए के डर से ग्रामीण काम पर भी नहीं जा रहे। गांव की महिलाएं व बच्चे घरों के भीतर कैद हैं। लोगों को डर है कि तेंदुआ आसपास ही मौजूद है, जो कभी भी हमला कर सकता है। जरुआपुर के भागवत गोंड़ ने बताया कि "हमाय गांव के बहुत जने हीरा खदान में मजूरी करन जात हैं, वे दो दिना से नहीं जा रहे। सबखां तेंदुआ को डर सता रहो" । गांव के ही युवक सुनील गोंड़ ने बताया कि कोरोना के डर से ज्यादातर लोग गांव से बाहर नहीं जाते थे, कुछ लोग ही हीरा खदान जाते रहे हैं। लेकिन तेंदुआ की मौजूदगी के कारण अब कोई भी काम पर नहीं जा रहा। सुनील ने बताया कि गांव का राकेश गोंड़ हीरा खदान गया था, लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि तेंदुआ बछड़ा उठाकर ले गया है वह भी वापस लौट आया है।

पीड़ित पशुपालकों को मिलेगा मुआवजा : मनौर व जरुआपुर गांव जहां तेंदुआ ने मवेशियों के बच्चों को मारा है, ये दोनों गांव उत्तर वन मंडल पन्ना के विश्रमगंज वन परिक्षेत्र में आते हैं। घटना के संबंध में जब उत्तर वनमंडल पन्ना के वन मंडलाधिकारी गौरव शर्मा से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि अभी वे घटना से अनभिज्ञ हैं। रेंजर से जानकारी लेकर पीड़ित पशुपालकों को त्वरित मुआवजा राशि दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। श्री शर्मा ने बताया कि जंगली जानवरों से पशु हानि होने के प्रकरण चार-पांच दिन में निपटाने के प्रयास किए जाते हैं। आपने बताया कि दुधारू पशुओं, बछड़ों व बकरी आदि की क्षति होने पर अलग-अलग मुआवजा राशि निर्धारित है। उसी के अनुरूप पीड़ितों को राशि प्रदान की जाती है।

Posted By: Brajesh Shukla
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