रीवा में राज्‍यपाल ने कहा- विद्यार्थी राष्ट्र के विकास और वंचित वर्ग के कल्याण में स्वयं को करें समर्पित

Updated: | Mon, 06 Dec 2021 02:53 PM (IST)

रीवा, नईदुनिया प्रतिनिधि। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा का नवम दीक्षांत समारोह पंडित शंभूनाथ शुक्ला सभागार विश्वविद्यालय में आयोजित किया गया है। समारोह के मुख्य अतिथि कुलाधिपति एवं राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने समारोह में 80 सफल विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की।

समारोह में 64 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट सफलताओं के लिए पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल श्री पटेल ने समारोह में विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका दीक्षा तथा शोध पत्रिका विंध्य भारती का विमोचन किया। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि दीक्षा समारोह जीवन के उद्देश्यों के संकल्प का अवसर है। हर विद्यार्थी जीवन के उद्देश्य निर्धारित कर नियमों का पालन करते हुए सही आचरण करे। समाज में न्यायवान, ज्ञानवान और आदर्श नागरिक के रूप में अपनी पहचान बनाएं। सभी विद्यार्थी राष्ट्र के विकास और वंचित वर्ग के कल्याण में स्वयं को समर्पित करें। हमारे जीवन का उद्देश्य तथा राष्ट्रहित जब एक समान होंगे तभी जीवन सार्थक बनेगा।

ज्ञान से बनता है श्रेष्ठ: राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्राचीन ग्रंथों में बताया गया है कि व्यक्ति जन्म से नहीं अपने कर्मों और ज्ञान से श्रेष्ठ बनता है। विद्यार्थी को ज्ञान का मार्ग बनाने के लिए आचार्य तथा गुरू दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भगवान भी जब इस धरती पर अवतार लेते हैं तो उन्हें गुरू से ज्ञान प्राप्त करना होता है। इसीलिए गुरू को ईश्वर के समकक्ष माना गया है। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उच्च शिक्षा की नई नीति लागू की है। नई शिक्षा नीति देश को ज्ञान की महाशक्ति बनाएगी। उन्होंने, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा जन समस्याओं के निदान का मार्ग प्रशस्त करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जनजातियों को जागरूक कर उन्हें सिकल सेल जैसे रोग रोग के निदान के लिए प्रेरित करें। सबके सहयोग से ही देश शक्तिशाली बनेगा। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफल जीवन की शुभकामनाएं दी।

विश्वविद्यालय का रहा है स्वर्णिम इतिहास: समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के कई विद्यार्थियों ने शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में अपना विशेष स्थान बनाया है। विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री की नई शिक्षा नीति को तत्परता से लागू किया है। कोरोना संकट के कठिन कालों में भी यहाँ पठन-पाठन और परीक्षाएं संचालित हुईं। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी बौद्धिक क्षमता से स्वयं तथा देश का नाम रोशन करने की शुभकामनाएं दी।

प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बाद मिलती है सफलता: समारोह में मुख्य वक्ता मुकुल कानिटकर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा और संघर्ष के बाद ही आनंद की प्राप्ति होती है। विद्यार्थी को कठिन परीक्षा से गुजरने के बाद ही सफलता मिलती है। हमें सफल के साथ-साथ सार्थक बनना चाहिए। हमारे जीवन का जब उद्देश्य स्पष्ट होगा तभी हमारा जीवन सार्थक बनेगा। अपने जीवन के लक्ष्यों का विचार करके इसे देश के ध्येय से जोड़कर लक्ष्य पूर्ति का प्रयास करें। दीक्षांत सही अर्थों में संकल्प का अवसर है। आज हर विद्यार्थी को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह जितना पाए उससे अधिक देश के विकास में योगदान का प्रयास करे।

निकाली गई शोभायात्रा: समारोह शुरू होने पर भव्य शोभा यात्रा में राज्यपाल श्री पटेल का परंपरागत रूप से स्वागत किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति राजकुमार आचार्य ने राज्यपाल पटेल एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की वार्षिक गतिविधियों का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया। समारोह में राज्यपाल श्री पटेल तथा अन्य अतिथियों को शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया। समरोह का संचालन कुलसचिव डॉ. सुरेन्द्र सिंह ने किया।

ये रहे उपस्थित: समारोह में महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय छतरपुर के कुलपति डॉ. टीआर थापक, कलेक्टर डॉ. इलैयाराजा टी, पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन, भाजपा जिला अध्यक्ष डॉ. अजय सिंह, विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, गणमान्य नागरिक तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Posted By: Ravindra Suhane