वीडियो: दुल्हन के नहीं थे मामा तब नोएडा के अनजान व्यापारी ने श्रीकृष्ण बन निभाई भात की रश्म

Updated: | Wed, 24 Nov 2021 07:39 PM (IST)

- पुरातन कथा नरसी भात की तरह श्रीकृष्ण बनकर व्यापारी ने पहनाया भात

शिवपुरी. नईदुनिया प्रतिनिधि। भारतीय परंपरा में विवाह का बहुत महत्व है और इसमें जुड़ी छोटी-छोटी रस्में परिवार बड़ी शिद्दत के साथ निभाता है। विवाह की एक जरूरी रस्म होती है 'भात'। लड़की की शादी में यह परंपरा उसका मामा निभाता है। बदरवास जनपद के एजवारा गांव में थान सिंह यादव के परिवार में बेटी का विवाह था। लड़की के कोई मामा नहीं थे जो यह रस्म निभाते। ऐसी स्थिति में लड़की के नाना भात लेकर आते हैं। लेकिन यहां पर परेशानी यह थी कि लड़की के नाना 30 साल पहले ही सन्यास ले चुके हैं। ऐसे में नोएडा का एक अंजान शख्स यादव परिवार में भात लेकर आया। भात भी ऐसा कि पूरे गांव में चर्चा का विषय बन गया। भात में पूरे गांव के लोगों के लिए कुछ न कुछ उपहार था। नोएडा का सिंघल परिवार 11 लाख रुपये से अधिक का भात इस अंजान परिवार के लिए चढ़ाकर गया। ग्रामीण इसे नरसी भात बता रहे हैं जो श्रीकृष्ण की पौराणिक कथाओं में सुनाया जाता है।

बेटी व सन्यासी पिता की बातें सुनकर भावुक हुआ था व्यापारी

थान सिंह यादव ने बताया कि उसके ससुर सन्यास ले चुके हैं। जब पत्नी ने भात के लिए उनके पास जाने की इच्छा जताई तो पता करने पर जानकारी मिली कि वह अब उत्तप्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के जेवर में एक आश्रम में रहते हैं। दोनों लोग उनके पास पहुंचे तो वहां उन्होंने कहा कि मैं तो अब सन्यासी हूं और सांसारिक रस्म निभाना अब मेरे लिए ठीक नहीं है। यह सुनकर थान सिंह की पत्नी भावुक हो गई और वहीं पर रोने लगी। जब पिता-पुत्री के बीच यह संवाद चल रहा था तो आश्रम में नोएडा के फुटवियर व्यापारी गोविंद सिंघल भी वहां मौजूद थे। सिंघल ने वहां थान सिंह और उसकी पत्नी ने कहा कि वे चिंता न करें और जाकर शादियों की तैयारी करें। गोविंद सिंघल ने कहा कि मैं अपने परिवार के साथ भात लेकर आऊंगा। थान सिंह को लगा कि वह सांत्वना देने के लिए यह कह रहा है और इसके बाद वह लोग अपने गांव वापस लौट आए। जब भात का दिन आया तो सिंघल परिवार अपने वादे के मुताबिक भात लेकर आ गया। इसमें पूरे गांव के लिए तोहफे थे।

नरसी भात के प्रसंग का हुआ स्मरण और पहुंच गए गांव

गोविंद सिंघल ने भात में 4.5 लाखों रुपए के करीब 9 तौले सोना के आभूषण, एक किलो चांदी के जेवर, दूल्हे के लिए 1 लाख रुपए नकद और स्मार्टफोन, पूरे गांव की महिलाओं के लिए साड़ियां, सभी रिश्तेदारों के लिए कपड़े और पूरे गांव के लिए उपहार दिए गए। गोविंद सिंघल ने कहा कि उसने श्रीकृष्ण की कथाओं में नरसी भात का प्रसंग सुना था। जब थान सिंह और उसकी पत्नी अपने पिता से भात मांग रहे थे और उन्होंने इंकार कर दिया था तब ही मेरे मन में नरसी भात का प्रसंग का स्मरण हुआ और मैंने फैसला कर दिया कि उनके परिवार में यह रस्म मैं निभाऊंगा।

यह है नरसी भात का प्रसंग

भगवान श्री कृष्ण ने माता रुक्मणी के साथ अपने भक्त नरसी का मान रखने के लिए स्वयं जाकर भात की परंपरा का पालन किया था। भगवान श्रीकृष्ण सांवरिया सेठ बनकर वहां पर पहुंचे और स्वयं को नरसी का मुनीम बताया। श्रीकृष्ण अपने साथ माता रुकमणी को भी लेकर आए थे। उन्होंने एक-एक कर सभी को भात ओढ़ाया था। यह देखकर पूरे गांव वालों की आंखें फटी रह गईं। साथ ही भगवान ने ग्रामीणों को भी भात व उपहार दिए। भगवान श्री कृष्ण की यह लीला सदा के लिए अमर हो गई क्योंकि वहां के लोगों ने चित्तौड़गढ़ में सांवरिया सेठ के नाम से भगवान श्री कृष्ण का मंदिर स्थापित किया। दुनिया भर के लोग सांवरिया सेठ की देहरी पर साष्टांग करने आते हैं।

Posted By: anil.tomar