Mahakal Sawari 2021: ज्योतिर्लिंग की परंपरा, तीर्थ पूजन के लिए शिप्रा तट जाएंगे अवंतिकानाथ

Updated: | Wed, 27 Oct 2021 08:27 AM (IST)

Mahakal Sawari 2021: राजेश वर्मा, उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। धर्मशास्त्रीय मान्यता में साल के बारह महीनों में कार्तिक मास विशेष है। इस पुण्य पवित्र मास में तीर्थ पूजन का विधान है। भगवान महाकाल अवंतिका के राजा हैं, इसलिए वे भी कार्तिक मास में तीर्थ पूजन के लिए शिप्रा तट जाते हैं। इस बार भी कार्तिक अगहन मास में भगवान महाकाल की पांच सवारी निकलेगी। 8 नवंबर को पहली तथा 29 नवंबर को शाही सवारी निकलेगी। वैकुंठ चतुर्दशी पर 18 नवंबर को रात 11 बजे हरि हर मिलन की सवारी निकलेगी। वर्षभर की विभिन्न सवारियों के क्रम में यह एक मात्र सवारी है, जो मध्य रात्रि में निकलती है।

अनूठी परंपरा...शुक्ल पक्ष में शुरू होती है सवारी

ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की परंपराएं अनूठी हैं। श्रावण भादौ मास में भगवान महाकाल की सवारी निकलने का क्रम कृष्ण पक्ष के प्रथम सोमवार से होता है। जबकि कार्तिक अगहन मास की सवारी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से निकली जाती है। इस बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष का प्रथम सोमवार 8 नवंबर को है। इसलिए इस दिन पहली सवारी निकलेगी।

कार्तिक मास में निभाते हैं मराठाकालीन परंपरा

ज्योतिर्विद पं.आनंदशंकर व्यास ने बताया उज्जैन में सिंधिया स्टेट का शासन रहा है। महाराष्ट्रीयन परंपरा में किसी भी माह का शुभारंभ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से माना जाता है। इसलिए पहले महाकाल की सवारी शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू होती थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नगर के प्रबुद्धजनों के परामर्श से प्रशासन ने श्रावण मास की सवारी श्रावण मास के कृष्ण पक्ष के प्रथम सोमवार से निकालने की परंपरा शुरू की। लेकिन कार्तिक मास की सवारी अब भी शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार से ही निकालने की परंपरा चली आ रही है।

हरि को पुन: सृष्टि का भार सौंपने जाएंगे हर

पं.महेश पुजारी के अनुसार धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास के चार माह भगवान विष्णु सृष्टि का भार भगवान शिव के हाथों में सौंपकर पाताललोक में राज बलि का आतिथ्‍य स्वीकार करते हैं। इस दौरान चार माह शिव सृष्टि के अधिपति होते हैं। देवप्रबोधिनी एकादशी पर देश शक्ति जागृत होने के बाद भगवान विष्णु पुन: वैकुंठ पधारते हैं। उनके वैकुंठ लौटने पर चतुर्दशी के दिन हर भगवान महाकाल हरि भगवान विष्णु का सृष्टि का भार सौंपने सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर जाते हैं। यहां मध्यरात्रि में उत्सव मनाया जाता है।

कार्तिक अगहन मास की सवारी कब-कब

-8 नवंबर कार्तिक शुक्ल चतुर्थी पर पहली सवारी

-15 नवंबर कार्तिक शुक्ल एकादशी पर दूसरी सवारी

-18 नवंबर वैकुंठ चतुर्दशी पर रात 11 बजे तीसरी सवारी

-22 नवंबर अगहन शुक्ल तृतीया पर चौथी सवारी

-29 नवंबर अगहन शुक्ल दशमी पर शाही सवारी

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay