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Mahakal Temple Ujjain: ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल को गर्मी से बचाने के लिए परंपरागत उपाय

Updated: | Wed, 28 Apr 2021 08:18 PM (IST)

Mahakal Temple Ujjain: उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल को गर्मी से बचाने के जतन शुरू हो गए हैं। वैशाख कृष्ण प्रतिपदा पर बुधवार को सुबह भस्मारती के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल के शीश गलंतिका बांधी। देश की पवित्र नदियों के नाम से 11 मिट्टी के कलशों द्वारा भगवान के शीश शीतल जलधारा प्रवाहित करने का क्रम शुरू हो गया।

वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से ज्येष्ठ पूर्णिमा तक दो माह तक प्रतिदिन सुबह छह से शाम चार बजे तक भगवान के जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहेगा। मंदिर परिसर स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में भी महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से गलंतिका बांधी गई। सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर में भगवान गोपालजी को चंदन अर्पित किया गया। सांदीपनि आश्रम में भी भगवान श्रीकृष्ण,बलराम व सुदामाजी का चंदन श्रंगार हुआ।

मंगलनाथ मंदिर में भी बंधी गलंतिका

मंगलनाथ मंदिर में भी गलंतिका बांधी गई। पं.महेंद्र भारती ने बताया मंगल ग्रह की प्रकृति गर्म है, इसलिए शीतलता के लिए भगवान के शीश गलंतिका बांधी गई। वैशाख मास में भातपूजा का विधान भी है। इन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते भातपूजा पर रोक लगी है।

महंत परिवार द्वारा प्रत्येक मंगलवार को भातपूजा की जाएगी। इस्कान मंदिर में 14 मई अक्षय तृतीया से 21 दिवसीय चंदन यात्रा की शुरुआत होगी। इसके लिए मलयागिरी से विशेष तौर पर चंदन मंगवाया गया है। पीआरओ राघव पंडित दास ने बताया शुरुआत के सात दिन भगवान मदन मोहन को चंदन अर्पित किया जाएगा। इसके बाद शेष 14 दिन भगवान के अर्चा विग्रह पर चंदन का लेपन होगा। चंदन लेपन से श्याम वर्ण भगवान पीतांबर स्वरूप में नजर आते हैं।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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