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National Youth Day 2021: द‍िन की शुरुआत बस्तीवालों को चाय पिलाने के साथ, शाम बीतती है गरीब बच्चों को पढ़ाने- भोजन कराने में

Updated: | Mon, 11 Jan 2021 08:07 PM (IST)

National Youth Day 2021: धीरज गोमे, उज्जैन (नईदुनिया)। युवाओं के आदर्श स्वामी विवेकानंद ने कहा था- 'उठो, जागो, और तब तक ना रुको जब तक कि लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए"। पढ़ी-सुनी यह बात यहां के डबल एमए और एमबीए किए विजय दीक्षित के दिलो-दिमाग मे इतनी घर कर गई कि उन्होंने जरूरतमंदों की सेवा को जिंदगी का मकसद बना लिया। वे निस्वार्थ सेवा के लिए उठे, जागे और इस तरह आगे बढ़े कि आज वे युवाओं के बीच मिसाल हैं। 'तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा" की सोच को साथ लेकर वे तीन साल से ठंड, गर्मी, बरसात, हर मौसम में रोज सुबह बस्ती के 200-250 लोगों को निशुल्क चाय-नाश्ता करा रहे हैं। दोपहर में बस्ती के गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं, और शाम को भोजन करा रहे हैं। अपने अलग विचारों की वजह से लोग इन्हें प्यार से 'स्वतंत्र" कहते हैं।

विजय ने बताया कि पहले सिर्फ अपने और परिवार के उत्थान के लिए सोचा करता था। तीन साल पहले एक भंडारे में प्रसाद वितरण की सेवा दे रहा था। रात करीब 11 बजे भंडारा खत्म हो गया था और प्रसादी में करीब दो हजार लोगों का भोजन बचा हुआ था। उस वक्त मन में पीड़ा उठी कि यह भोजन सुबह तक यूं ही खराब हो जाएगा। अगले ही पल इच्छा जागी कि क्यों ने यह भोजन प्रसादी गरीब बस्ती में वितरित कर दी जाए। बस उठा और अपने दोस्तों की मदद से दो बस्तियों में यह भोजन लेकर चला गया। इस सेवा से मन को संतोष मिला। इसके बाद लगन लग गई कि जहां भी शादी समारोह या भंडारे का भोजन बचेगा वे एकत्र करके जरूरतमं को बाटेंगे।

सम्मान मिला पर प्रचार नहीं करते

इस सेवा के साथ बाद में निजी खर्च पर रामघाट, मजदूर सराय और बस्ती के लोगों को सर्दी में सुबह चाय- पोहे का नाश्ता कराना शुरू किया, फिर गर्म कपड़ों का वितरण। यह सेवा लॉकडाउन के दरमियान और बाद में भी जारी रखी। अभी वर्तमान में 250 से 300 लोगों को रोज सुबह चाय दी जा रही है। इसका खर्च विजय उठाते हैं।

भोजन के लिए ट्रस्ट का सहयोग

शाम को विजय और उनके साथी बस्तियों में बच्चों को पढ़ाते हैं। एमपी मानसिंगा ट्रस्ट के सहयोग से रोज शाम को 650 लोगों को भोजन भी कराया जाता है। इसके वितरण की व्यवस्था भी विजय और उनके साथी देखते हैं। पहले इस सेवा में वे अकेले थे। अब 80 सक्रिय साथी साथ हैं। इनके साथी उज्ज्वल खंडेलवाल, सूरज पांचाल, दिनेश जलवाल ने बताया कि स्वतंत्र को कई मंचों से सेवा कार्यों के लिए सम्मानित भी किया गया है, पर वे इसका प्रचार नहीं करते।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay
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