Ujjain News: पति को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था, पत्नी, सास, ससुर और साले को आजीवन कारावास

Updated: | Tue, 27 Jul 2021 07:39 PM (IST)

Ujjain News: नागदा जं. (नईदुनिया प्रतिनिधि)। चेन्नई की एक निजी कंपनी के विधि सलाहकार पति को मिर्ची बाजार स्थित एक मकान में पेट्रोल डालकर जलाने वाली पत्नी, दो सास, ससुर एवं साले को जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने मंगलवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा सुनते ही आरोपित कोर्ट में ही जोर-जोर से रोने लगे। न्यायालय ने चार वर्षीय पुत्री को देखरेख के लिए मामा के सुपुर्द किया है। सभी आरोपितों को भेरुगढ़ जेल भेजा गया।

चेन्नई की एक निजी कंपनी में विधि सलाहकार नरेंद्र पुत्र जगदीश गोयल निवासी पुलिस लाइन कालोनी झाबुआ का विवाह रीना पुत्री पीरूलाल जाजोरिया निवासी मिर्ची बाजार नागदा से हुआ था। रीना झाबुआ में न्यायालय में स्टेनो के पद पर कार्यरत थी। दोनों में विवाद के बाद रीना नागदा अपने मायके आ गई थी।

नरेंद्र रीना को लेने के लिए आया तो 25 मई 2017 को ससुराल वालों ने मिलकर उस पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। नरेंद्र जलता हुआ घर से बाहर आ गया, जिसे पड़ोसियों ने पानी डालकर बचाने का प्रयास किया। उपचार के दौरान 40 दिन बाद उसकी मौत हो गई थी।

जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश वंदनाराज पांडेय ने मंगलवार को ससुर पीरूलाल पुत्र भेरूलाल जाजोरिया, सास बंसतीबाई पत्नी पीरूलाल जाजोरिया, कमलाबाई पत्नी पीरूलाल जाजोरिया, पत्नी रीना गोयल और साला विनोद पुत्र पीरूलाल जाजोरिया को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। रीना की चार वर्षीय पुत्री को देखरेख के लिए मामा संतोष के सुपुर्द किया। अभियोजन की ओर से पैरवी एजेपी केशव रघुवंशी एवं रेवतसिंह ठाकुर ने की। नरेंद्र के पुत्र जगदीश गोयल झाबुआ में पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। कार्यवाही में कोर्ट मुंशी सोमसिंह भदौरिया की भूमिका रही।

40 दिन उपचार के बाद नरेंद्र की मौत

तत्कालीन इंचार्ज टीआइ हेमंतसिंह जादौन ने 25 मई 2017 की शाम को घटनास्थल को सील कर दिया था। 26 मई को एफएसएल अधिकारी प्रीति गायकवाड़ ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्रित किए थे, जिसमें बाथरूम से जली हुई सामग्री, पेट्रोल की बाटल सहित अन्य सामग्री जब्त की थी। मृतक के पिता जगदीश गोयल ने आरोप लगाया था कि विवाद के दौरान नरेंद्र पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी, जिससे लगभग 50 प्रतिशत चल चुके नरेंद्र को उपचार के लिए सरकारी अस्पताल नागदा में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर गहन चिकित्सा के लिए उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां लगभग 40 दिन तक उपचार चलने के बाद नरेंद्र की मौत हो गई थी।

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ससुर को छोड़ सभी की हो गई थी जमानत

प्रकरण दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले में पांचों आरोपित ससुर, दो सास, पत्नी व साले को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। ससुर पीरुलाल को छोड़कर चारों की जमानत हो गई थी। ससुर जेल में ही था। मंगलवार को फैसले के लिए पुलिस उसे जेल से लेकर आई थी। आरोपितों को जब बड़ी सजा सुनाई जाती है तो पूर्व से ही पुलिस बल न्यायालय में बुलवा लिया जाता है। मंगलवार को सजा सुनाने के समय न्यायालय में पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण सभी न्यायालय के कोर्ट मुंशी को एकत्रित कर आरोपितों को पुलिस वाहन में बैठाने के निर्देश दिए। डायल-100 बाइक चलाने वाले पुलिस जवानों को भी न्यायालय में बुलाया गया। पुलिस थाने के वाहन में आरोपितों को बैठाकर सीधा भेरूगढ़ जेल भेजा।

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay