Tigress Hunting : करंट से किया शिकार, फिर नाखून, दांत और मूछ के बाल निकालकर कुएं मे फेंका बाघिन का शव

Updated: | Thu, 16 Sep 2021 03:41 PM (IST)

उमरिया, नईदुनिया प्रतिनिधि। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मानपुर वन परिक्षेत्र के दमना बीट में बाघिन टी 32 का शिकार करने वाले तीन शिकारियों को वन विभाग ने गिरफ्तार कर लिया है। जबकि एक शिकारी पकड़े जाने से पहले ही फरार होने में सफल हो गया। पकड़े गए सभी शिकारी ग्राम कछौंहा के मंदिर टोला के रहने वाले हैं। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में शिव कुमार बैगा, बाबूलाल बैगा और कैलाश बैगा के नाम शामिल हैं। जबकि कल्याण बैगा भाग गया है।

शिवलाल ने उगला राज : वन विभाग ने लगातार हो रही बारिश के बीच उन रास्तों से जाकर आरोपित शिवलाल बैगा को सबसे पहले पकड़ा जहां से गुजरना किसी के बस की बात नहीं थी। अपनी झोपड़ी में दुबका बैठा शिवलाल अपने सामने वन विभाग के लोगों को देखकर दंग रह गया। वन विभाग के अधिकारियों को गांव के लोगों से यह सूचना मिल गई थी कि शिवलाला छिपा हुआ घूम रहा है। उसकी हरकत घटना के बाद से संदेहास्पद थी। वन विभाग के लोगों को अपने सामने पाकर शिवलाल बुरी तरह से घबरा गया और उसने पूरा राज उगल दिया।

करंट से शिकार : शिवलाल बैगा ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया कि शिकार के समय उसके साथ बाबूलाल बैगा और कैलाश बैगा और कल्याण बैगा भी थे। उन्होंने शिकार के लिए जीआई तार की मदद से करंट फैलाया था। इसी तार में बाघिन टी 32 फंस गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसकी मौत के बाद सभी ने मिलकर पहले तो करंट हटाया और उसके शव से नाखून, दांत और मूछ के बाल नोच लिए। इसके लिए

उन्होंने एक कल्हाड़ी का भी इस्तेमाल किया जिसे भी वन विभाग के लोगों ने जब्त कर लिया है।

कुएं में फेंका बाघिन का शव : शिवलाल ने वन विभाग के अधिकारियों को बताया कि उन्होंने घटना को छिपाने के लिए बोरे में पत्थर भरकर और उसे बाघिन के शव से बांधकर लाश को कुएं में डाल दिया था। इसी कुएं से बाद में जब कुएं में से बदबू आने लगी तो गांव के लोगों ने अंदर बाघिन का शव देखा और इसकी जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को दी। घटना के बाद से ही वन विभाग के अधिकारी शिकारियों को तलाश कर रहे थे।

अगस्त में तीन घटनाएं : अगस्त के महीने में तीन बाघों की मौत अलग-अलग घटनाओं में हुई थी। सबसे पहली मौत 16 अगस्त को हुई थी जो कि शिकार का ही परिणाम था। बाघिन का एक पैर शिकारी काट कर ले गए थे। इसके बाद 27 अगस्त को और फिर 29 अगस्त को तीसरी घटना हुई। मार्च और अप्रैल में भी दो-दो बाघों की मौत एक ही महीने में हुई है। अप्रैल में तो दो बाघों के साथ एक तेंदुए की भी मौत हो गई थी।

Posted By: Brajesh Shukla