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यदि आप भी बिल्डर से हैं परेशान तो बांबे हाईकोर्ट का ये फैसला बन सकता है मिसाल

Updated: | Wed, 30 Sep 2020 07:12 PM (IST)

मुंबई । Bombay High Court Order यदि आपने भी अपना खुद का घर बनाने का सपना देखा है और बिल्डर के चुंगल में फंस गए हैं तो बांबे हाईकोर्ट का आज का फैसला आपके लिए नींव का पत्थर साबित हो सकता है। आमतौर पर हम देखते हैं कि बिल्डर अपना फ्लैट या घर बेचते समय लुभावने वादे और सपने दिखाते हैं लेकिन पैसा वसूलने के बाद फ्लैट या घर देने में काफी देरी करते हैं। ऐसे बिल्डरों को सबक सिखाने के लिए बांबे हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। बांबे हाईकोर्ट ने रियल स्टेट डेवलपर रिनायसांस इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्देश दिया है कि वह उस व्यक्ति को मुआवजे के रूप में 5.04 करोड़ रुपये का भुगतान करे, जिसे उसने 80 महीने की देरी के बाद भी मुंबई में उसकी संपत्ति नहीं सौंपी थी।

रेरा टिब्यूनल के आदेश को दी थी चुनौती

25 सितंबर को जस्टिस एससी गुप्ते की एकल पीठ ने महाराष्ट्र रियल स्टेट विनियामक प्राधिकरण और रेरा अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेशों को बरकरार रखा, जिसने क्रेता को मुआवजा राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। डेवलपर रिनायसांस इंफ्रास्ट्रक्चर ने बांबे हाईकोर्ट में इस साल जनवरी में अपील कर रेरा और रेरा अपीलीय ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी थी। रेरा के आदेश के अनुसार, खरीददार ने दिसंबर 2009 में डेवलपर से छह भूखंडों और कुछ गोदामों की इमारतों को खरीदा था।

2010 में सौंपना था संपत्ति, अभी तक नहीं दी

बिक्री समझौते के अनुसार, 9 मार्च 2010 तक भंडारण भवन और भूखंड खरीददार को सौंप दिए जाने थे। इस समझौते में यह भी कहा गया कि यदि डेवलपर समय पर संपत्तियों को सौंपने में विफल रहा, तो वह खरीददार को प्रति माह 10 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से मुआवजा राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा। जब डेवलपर संपत्ति को सौंपने में विफल रहा, तो खरीददार ने रेरा से संपर्क किया जिसने मुआवजे की राशि 5.04 करोड़ रुपये के रूप में गणना की। डेवलपर ने अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष इस आदेश को चुनौती दी। इसमें उसे 50 फीसद जमा राशि तुरंत लौटाने को कहा गया था।

अब 4 सप्ताह में देने होंगे 5.04 करोड़ रुपए

लेकिन, जब डेवलपर पूर्व जमा का भुगतान करने में विफल रहा, तो अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपील को खारिज कर दिया। तब डेवलपर ने दूसरी अपील दायर की। अपने आदेश में जस्टिस गुप्ते ने यह कहते हुए दूसरी अपील को खारिज कर दिया कि रेरा और अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेशों में कोई कमी नहीं थी। उन्होंने कहा कि आदेश हाईकोर्ट के विचार के लिए कानून के किसी भी महत्वपूर्ण प्रश्न को जन्म नहीं देते हैं। जस्टिस गुप्ते ने कहा कि डेवलपर संपत्ति के लिए सहमत होने के लिए उत्तरदायी था। हाई कोर्ट ने कहा डेवलपर को चार सप्ताह के भीतर खरीददार को 5.04 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

Posted By: Sandeep Chourey
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