HamburgerMenuButton

Jupiter Saturn Conjunction: आज ब्रह्मांड में अद्भुत घटना, 397 साल बाद आपस में छूते दिखेंगे शनि व बृहस्पति ग्रह

Updated: | Mon, 21 Dec 2020 12:03 PM (IST)

नैनीताल (रमेश चंद्रा)। amazing view in universe on 21 December Jupiter and Saturn हाल के दिनों में लगातार कुछ अनोखी घटना देखने को मिल रही है। बीती रात जहां एक विशालकाल उल्कापिंड धरती के करीब से गुजरा तो आज 30 नवंबर को चंद्रग्रहण है। अब दिसंबर माह में भी सूर्य ग्रहण होने के साथ आसमान में एक अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति व शनि 397 साल बाद एक दूसरे आसमान में छूते हुए दिखाई देंगे। यह संयोग वर्ष 2020 से सबसे छोटे दिन 21 दिसंबर को देखने को मिलेगी। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस दुर्लभ खगोलीय घटना में दोनों ग्रहों के बीच की आभासी दूरी मात्र 0.06 डिग्री रह जाएगी। साथ ही इन दोनों के चंद्रमाओं को भी एक डिग्री के अंतराल में देखने का अवसर होगा। इसके बाद यह घटना 376 साल बाद होगी ।

आंखों से देख सकेंगे ये अद्भुत नजारा

आर्यभटट् प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के खगोल विज्ञानी डॉ. शशि भूषण पांडेय ने कहा कि आसमान में शनि व गुरु को इन दिनों हम नग्न आंखों से भी देख सकते हैं। अब यह दोनों ग्रह रोमांचक संयोग बनाने जा रहे हैं, जिसमें गुरु व शनि अपनी कक्षा में परिभ्रमण करते हुए एक-दूसरे को छूते हुए नजर आएंगे। चांदी के समान चमकीले रंग के छल्लों में लिपटा शनि ग्रह के साथ उसके उपग्रह टाइटन व रेया भी दिखाई देंगे। साथ ही बृहस्पति के चार चांद यानी उपग्रह गायनामिड, कैलेस्टो, आइओ व यूरोपा भी इस दौरान साथ में नजर आएंगे। इस घटना में दोनों ग्रहों शनि और बृहस्पति के साथ-साथ उनके उपग्रहों के बीच की दूरी भी एक डिग्री के अंतराल में रह जाएगी।

चिपका हुआ दिखाई देगा बृहस्पति का चांद आइओ

बृहस्पति का चांद आइओ इस दौरान ऐसा दिखाई देना मानो चिपका हुआ हो। पृथ्वी से देखने पर इनके बीच की आभाषीय दूरी होगी, जबकि वास्तविकता में शनि व गुरु के बीच नजदीक आने के बाद भी औसत दूरी करीब 65.5 करोड़ किमी होती है, जबकि जब ये दोनों ग्रह सबसे ज्यादा दूर होते हैं तो इनमें अधिकतम दूरी औसतन 2.21 अरब किमी होती है। वहीं इन दोनों ग्रहों के पबीच आपसी दूरी 1.5 लाख से 2.5 करोड़ किमी होगी। इस दुर्लभ खगोलीय घटना में दोनों ग्रहों के उपग्रहों को सामान्य आंखों से नहीं देखा जा सकता है, इसके लिए दूरबीन की मदद लेनी होगी। इस घटना के बाद करीब 376 साल बाद ये दोनों ग्रह एक-दूसरे के इतने ही करीब पहुंचेंगे। हालांकि हर 20 साल में यह दोनों एक-दूसरे के करीब पहुंचते हैं।

पहली बार गैलीलियो ने देखी थी ये घटना

महान विज्ञानी गैलीलिओ गैलीली ने टेलीस्कोप बनाने के बाद 1623 में शनि व गुरु को इतने करीब देखा था। टेलीस्कोप की सुविधा उपलब्ध हो जाने से ग्रह नक्षत्रों समेत ब्रह्मांड के कई रहस्यमय व भ्रामक तथ्यों की सत्यता का पता चला था। इस बार इस घटना की रोचकता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यह खगोलीय घटना साल के सबसे छोटे दिन होने जा रही है। इस दुर्लभ खगोलीय घटना को विज्ञानियों ने 'ग्रेट कंजंक्शन' नाम दिया है। कंजंक्शन का मतलब होता है आच्छादन। इस तरह की घटनाएं सौर मंडल में अक्सर होती रहती हैं, लेकिन दो बड़े ग्रहों के बेहद नजदीक आने की घटना सदियों बाद ही हुआ करती हैं, इस कारण इसे ग्रेट कंजंक्शन नाम दिया गया है।

Posted By: Sandeep Chourey
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.