Explained: जानिए क्या है आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक, कैसे यह ऑर्डिनेन्स फैक्ट्रीज को प्रभावित करेगा

Updated: | Tue, 03 Aug 2021 11:10 PM (IST)

Explained: रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट (Ajay Bhatt) ने हाल में लोकसभा (Lok Sabha) में आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक (Essential Defence Service Bill) पेश किया। अनिवार्य रूप से आवश्यक रक्षा सेवा विधेयक का उद्देश्य सरकारी स्वामित्व वाली ऑर्डनेन्स फैक्ट्रीज (Ordance Factories) के कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से रोकना है। देशभर में 41 आयुध कारखानों में करीब 70 हजार लोग काम करते हैं। गुरुवार को पेश किए गए विधेयक में कहा गया है कि यह आवश्यक रक्षा सेवाओं के रखरखाव के लिए प्रदान करने के लिए है, ताकि राष्ट्र की सुरक्षा और बड़े पैमाने पर जनता और संपत्ति को सुरक्षित किया जा सके। सरकार ने कहा है कि भारतीय ऑर्डनेन्स फैक्ट्रीज सबसे पुराना और सबसे बड़ा औद्योगिक सेटअप है। जो रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के तहत कार्य करता है। आयुध कारखाने रक्षा हार्डवेयर और उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन के लिए एक एकीकृत आधार बनाते हैं। जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को अत्याधित युद्धक्षेत्र उपकरणों से लैस करना है।

इसके अलावा सरकार द्वारा कहा गया है कि सशस्त्र बलों को देश की रक्षा तैयारियों के लिए ऑर्डनेन्स वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखी जाए। वह कारखाने बिना किसी रुकावट के कार्य जारी रखे, विशेष तौर पर मौजूदा स्थिति को देखते हुए। देश के उत्तरी मोर्चे पर यह आवश्यक महसूस किया गया कि सरकार को ऐसे प्रयासों से उत्पन्न इमरजेंसी स्थिति से निपटने की शक्ति होनी चाहिए। साथ ही रक्षा से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों में आवश्यक रक्षा सेवाओं को रखरखाव को सुनिश्चित करना चाहिए।

यह सरकार को क्या करने की अनुमति देता है?

विधेयक सरकार को इसमें उल्लिखित सेवाओं को आवश्यक रक्षा सेवाओं के रूप में घोषित करने का अधिकार देता है। जिसके काम की समाप्ति रक्षा उपकरणों या सामानों के उत्पादन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगी। यह आवश्यक रक्षा सेवाओं में लगे किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान या इकाई में हड़ताल और तालाबंदी पर रोक लगाता है।

सरकार को क्यों इसकी आवश्यकता महसूस हुई?

सरकार ने जून में आयुध निर्माण बोर्ड के निगमीकरण की घोषणा की थी। जिसके तहत सशस्त्र बलों के लिए 41 कारखाने गोला-बारूद और अन्य उपकरण सात सरकारी स्वामित्व वाली कॉर्पोरेट संस्थानों का हिस्सा बन जाएंगे। ऑर्डनेंन्स सीधे तौर पर रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन था। वह सरकार की एक शाखा के रूप में काम करता है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य कारखानों की दक्षता और जवाबदेही में सुधार करना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 जून को फैसले की घोषणा करते हुए कहा था कि ओएफबी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाएगी। मैं आश्वासन देता हूं कि इस कदम से कर्मचारियों की सेवा शर्ते प्रभावित नहीं होंगी।

विधेयक में उल्लेख है कि इन कारखानों के कर्मचारी निर्णय के खिलाफ हड़ताल पर जा सकते हैं। हालांकि मुख्य श्रम आयुक्त के स्तर पर सरकार द्वारा शुरू की गई सुलह की कार्यवाही 15 जून को हुई बैठक में विफल रही थी। आयुध निर्माण बोर्ड के कर्मचारियों की सेवा शर्तों का ध्यान रखते हुए सरकार ने विधेयक के उद्देश्यों में उल्लेख किया। उन्हीं उद्देश्यों के लिए सरकार ने 30 जून को आवश्यक रक्षा सर्विस अध्यादेश जारी किया। विधेयक उसकी जगह लेगा।

Posted By: Shailendra Kumar