Pegasus Issues: सिब्बल बोले- ये निजता पर हमला, चीफ जस्टिस बोले, तो फिर FIR क्यों नहीं करवाई?

Updated: | Thu, 05 Aug 2021 10:59 PM (IST)

नई दिल्ली Pegasus Issues। पेगासस जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल की दलीलों के सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि जासूसी मामले में जांच के आदेश देने के ठोक प्रमाण नहीं है। कपिल सिब्बल ने अमेरिका और फ्रांस में इसी तरह की जासूसी के मामलों का जिक्र किया तो सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या उन सभी केस में भारत का भी जिक्र है तो कपिल सिब्बल ने साफ इंकार कर दिया। इसके बाद कपिल सिब्बल ने दूसरी दलील रखी कि भारत में जिन लोगों की जासूसी का आरोप है, उनमें जज और पत्रकार भी शामिल है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि उन लोगों ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है तो इसके जवाब में भी कपिल सिब्बल ने इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े सभी पहलूओं पर हमारी नजर है। गौरतलब है कि जासूसी मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत की बेंच कर रही है। गौरतलब है कि वरिष्ठ पत्रकार एनराम और शशिकुमार, सीपीएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास और वकील एमएल शर्मा ने पेगासस जासूसी विवाद में सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। वहीं दूसरी ओर पेगासस जासूसी केस को लेकर संसद में भी लगातार जांच को लेकर विपक्ष हंगामा कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सभी याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वह अपनी याचिका की एक कॉपी केंद्र सरकार को भी दें। अब पेगासस मामले में सुनवाई अगले सप्ताह होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान एमएल शर्मा को भी फटकार लगाई, जिन्होंने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और अन्य व्यक्तिगत लोगों के खिलाफ याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में फायदा उठाने की कोशिश न करें।

याचिकाकर्ताओं ने ओर से कपिल सिब्बल है वकील

याचिकाओं में नेताओं और पत्रकारों की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिए कथित जासूसी कराए जाने के बारे में जांच कराने का अनुरोध किया गया है। पत्रकारों की ओर से अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में पहले कहा था कि याचिका के व्यापक असर को देखते हुए इस पर तत्काल सुनवाई की जरूरत है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि कथित जासूसी भारत में विरोध की स्वतंत्र अभिव्यक्ति को दबाने और हतोत्साहित करने का सरकारी प्रयास है। याचिका में कहा गया है कि यदि सरकार या कोई सरकारी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर का लाइसेंस लिया, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से इसका इस्तेमाल किया तो केंद्र सरकार को इस बारे में खुलासा करना चाहिए।

300 लोगों की पेगासस स्पाइवेयर से निगरानी की रिपोर्ट

एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संघ ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि 300 से अधिक सत्यापित भारतीय मोबाइल फोन नंबरों को इजराइल के पेगासस स्पाइवेयर के जरिए निगरानी के लिए संभावित लक्ष्यों की सूची में रखा गया। इस खुलासा के बाद संसद में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और इस मामले में जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगाई है।

Posted By: Sandeep Chourey