Pranav Mukherjee Political Carrier : करीब 42 साल केंद्र में मंत्री रहे प्रणब दा, ऐसा था राजनीतिक सफर

Updated: | Mon, 31 Aug 2020 10:55 PM (IST)

नई दिल्ली । Pranav Mukherjee Political Carrier लंबी बीमारी के बाद सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया। 84 वर्षीय प्रणब मुखर्जी को मस्तिष्क में खून का थक्का जमने के कारण 10 अगस्त से अस्पताल में भर्ती किया गया था। प्रणब मुखर्जी कोरोना संक्रमित थे और बीते कुछ दिनों से उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। प्रणब मुखर्जी बीते पांच दशक से देश के सियासत में सक्रिय थे और करीब 42 साल तक केंद्र में मंत्री रहे। प्रणब मुखर्जी 169 में पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए थे। आइए जानते हैं कैसा था उनका सियासी सफर

1935 में बंगाल में हुआ था जन्म

प्रणब मुखर्जी का जन्म 11 दिसंबर 1935 को हुआ। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में जन्म से लेकर प्रणब मुखर्जी ने देश के प्रथम नागरिक यानी राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया। आमतौर पर 'प्रणब दा' के नाम से मशहूर प्रणब मुखर्जी को देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। प्रणब दा देश के वित्त मंत्री, विदेश मंत्री और राष्ट्रपति पद पर रह चुके हैं। इसके अलावा करीब 42 साल तक अलग-अलग प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं।

ऐसे हुआ सियासत में प्रवेश

प्रणब मुखर्जी के पिता किंकर मुखर्जी ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में संघर्ष किया था। प्रणब दा ने सूरी विद्यासागर कॉलेज से पढ़ाई के बाद पॉलिटिकल साइंस और इतिहास में एमए किया। साथ में एलएलबी की भी डिग्री हासिल की। बाद में उन्होंने राजनीति क अपने जीवन का लक्ष्य बना दिया। पहले ही दौर में इंदिरा गांधी पर अपनी छाप छोड़ी। बैंकों के राष्ट्रीयकरण में भूमिका निभाई। प्रणब मुखर्जी 1969 में इंदिरा गांधी की मदद से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य चुने गए। 1973 में कांग्रेस सरकार के मंत्री भी बन गए थे।

सफल वित्त मंत्री के रूप में पहचान

प्रणब मुखर्जी को इंदिया गांधी ने 1982 में पहली बार वित्त मंत्री बनाया था। 1982 से 1984 के बीच उन्होंने अपने शानदार कार्य से वित्त मंत्री के रूप में विशेष पहचान बनाई और इंदिरा गांधी के विश्वस्त सहयोगी बन गए। हालांकि इंदिरा गांधी के निधन के बाद वे प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे, लेकिन राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनाए जाने के कारण पार्टी से मतभेद हो गए और अलग पार्टी का गठन कर लिया। आखिरकार राजीव गांधी से समझौते के बाद 1989 में उन्होंने अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया।

दूसरी बार प्रधानमंत्री बनने से चूके प्रणब दा

2004 के लोकसभा चुनाव में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। विदेशी मूल के आरोपों से घिरी सोनिया गांधी ने ऐलान कर दिया कि वह प्रधानमंत्री नहीं बनेंगी। इसके बाद भी प्रणब मुखर्जी को दरकिनार कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया। वहीं दूसरे कार्यकाल में भी प्रणब मुखर्जी से प्रधानमंत्री बनने का मौका निकल गया।

देश के 13वें राष्ट्रपति बने

2012 में मंत्री पद से इस्तीफा देने से पहले मनमोहन सिंह की सरकार में उनका स्थान दो नंबर का था। 2012 में कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रपति चुनाव में उतारा और उन्होंने बड़ी आसानी से पीए संगमा को चुनाव में हराकर देश के 13वें राष्ट्रपति बने

RSS के कार्यक्रम में पहुंच कर चर्चा में आए थे प्रणब दा

जून 2018 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम को संबोधित करने को लेकर भी प्रणब मुखर्जी जबरदस्त चर्चा में रहे। साल 2019 में मोदी सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया था।

Posted By: Sandeep Chourey
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