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पढ़िए सुभाषचंद्र बोस के प्रेम विवाह, हिटलर से मुलाकात और मौत के रहस्य की पूरी कहानी

Updated: | Sat, 23 Jan 2021 07:23 AM (IST)

Subhash Chandra Bose Jayanti 2021: जय हिंद और तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा जैसे प्रचलित नारे देने वाले सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 ओडिशा के कटक शहर में हुआ। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माता का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ कटक शहर के एक मशहूर वकील थे। सुभाष चंद्र स्वतन्त्रता संग्राम के सबसे बड़े नेता थे। द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान की मदद से आजाद हिंद फौज का गठन किया। 21 अक्टूबर 1943 को बोस ने आजाद हिंद फौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में आजाद भारत की अस्थायी सरकार बनाई थी। जिसे जापान, फिलीपींस, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड सहित 11 देशों की सरकार ने मान्यता दी। आइए जानते है सुभाषचंद्र बोस के जीवन के बारे में-

आंख खराब होने के कारण नहीं मिला था सेना में प्रवेश

सुभाषचंद्र बोस ने कटक से प्राइमरी शिक्षा लेने के बाद रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में एडमिशन लिया। यहां के प्रिंसिपल बेनीमाधव दास से सुभाष काफी प्रभावित हुए और 15 साल की उम्र में विवेकानंद साहित्य का पूरा अध्ययन कर लिया। 49वीं बंगाल रेजीमेंट में भर्ती के लिए उन्होंने एग्जाम दिया, लेकिन आंखें खराब होने के कारण सेना में प्रवेश नहीं मिला। बोस ने 1919 में बीए (ऑनर्स) की परीक्षा पास की। उनके पिता की इच्छा थी कि वह आईसीएस बने। ऐसे में 15 सिंतबर 1919 को वह इंग्लैंड चले गए। यहां लंदन में किट्स विलियम हाल में परीक्षा का अध्ययन करने के लिए एडमिशन मिल गया। 1920 में उन्होंने वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए आईसीएस की परीक्षा पास की। लेकिन सुभाष के अंग्रेजों के गुलाम बनकर नौकरी नहीं करना चाहते थे और एक साल बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

महात्मा गांधी से पहली मुलाकात

सुभाषचंद्र बोस विदेश से लौटते ही महात्मा गांधी से मिले। यह दोनों की पहली मुलाकात थी। गांधी जी ने उन्हें कोलकाता जाकर दासबाबू के साथ काम करने की सलाह दी। उन दिनों गांधी अंग्रेज सरकार के खिलाफ असहयोग आंदोलन चला रहे थे। दासबाबू आंदोलन का बंगाल में नेतृत्व कर रहे थे। सुभाष भी इस आंदोलन से जुड़ गए। 1922 में दासबाबू ने स्वराज पार्टी की स्थापना की और कोलकाता महापालिका का चुनाव जीत लिया। सुभाषचंद्र जल्द ही देश के एक युवा नेता बन गए। बोस ने जवाहरलाल नेहरू के साथ मिलकर इंडिपेंडेंस लीग की शुरुआत की थी। अपने जीवन में सुभाष कुल 11 बार जेल गए।

एमिली शेंकल से प्रेम विवाह

साल 1934 में सुभाष ऑस्ट्रिया में अपना इलाज कराने गए। तब उन्हें अपनी बुक लिखने के लिए एक अंग्रेजी टाइपिस्ट की जरूरत थी। उनके एक दोस्त से एमिली शेंकल नाम की एक महिला से उनकी मुलाकात कराई। सुभाष और एमिली को एक दूसरे से प्रेम हो गया। दोनों ने हिंदू रीति रिवाजों से शादी कर ली।

हिटलर से मुलाकात

सुभाषचंद्र बोस ने जर्मनी ने भारतीय स्वतंत्रता संगठन और आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की। इस दौरान बोस की जर्मन सरकार के मंत्री एडम फॉन ट्रॉट से दोस्ती हो गई। 29 मई 1942 को सुभाष एडॉल्फ हिटलर से मिले थे। हिटलर को भारत में कोई रुचि नहीं थी, उन्होंने बोस की सहायता को लेकर कोई जवाब नहीं दिया। 21 अक्टूबर 1943 को सुभाष ने आर्जी-हुकूमते-आजाद हिंद की स्थापना की। वे खुद इस सरकार के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और युद्धमंत्री बने। इस सरकार को 9 देशों ने मान्यता दी थी। इसके बाद वह आजाद हिंद फौज के प्रधान सेनापति भी बन गए।

मौत अब तक रहस्य

सुभाष चंद्र बोस की मौत को लेकर आज भी एक रहस्य है। 18 अगस्त 1954 को बोस हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे। इस सफर के बाद वे लापता हो गए। 23 अगस्त को टोकियो रेडियो ने बताया कि बोस एबोस का विमान ताइहोकू एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। सिंतबर में उनकी अस्थियां जापान की राजधानी टोकियो के रैंकोजी मंदिर में रखी गई। भारत सरकार ने इस घटना की जांच के लिए 1965 और 1977 में दो बार आयोग नियुक्त किया। 1999 में मनोज कुमार मुखर्जी के नेृत्व में तीसरा आयोग बना। 2005 में ताइवान सरकार ने मुखर्जी आयोग को बताया कि 1945 को कोई विमान हादसा नहीं हुआ था। आयोग ने भारत सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश की लेकिन कोई सबूत नहीं होने के कारण सरकार ने रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया। 16 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने सुभाषचंद्र बोस के लापता होने के रहस्य से जुड़ी खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच गठन का आदेश दिया।

Posted By: Arvind Dubey
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